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ॐ

Pujas

Traditional worship ceremonies for various occasions and deities. Book experienced pandits for authentic Vedic rituals.

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42 Results found

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puja
भगवान गणेश और माँ लक्ष्मी वास्तुपुरुष

Grih Pravesh (गृह प्रवेश पूजा)

आप अपने नए घर की सजावट और मेहमानों के स्वागत की तैयारी कीजिए, पूजा की पवित्रता और सम्पूर्ण विधि-विधान की ज़िम्मेदारी पूजा सारथी (Puja Sarthi) पर छोड़ दीजिए। हमारे अनुभवी और विद्वान पंडित जी आपके नए निवास स्थान पर आकर पूरी वैदिक रीती-रिवाज से गृह प्रवेश संपन्न कराएंगे। ✨ हमारी सेवा की मुख्य विशेषताएं - 🌟 अनुभवी एवं विद्वान आचार्यों द्वारा विधि-विधान से पूजा। 🌸 द्वार पूजा, कलश स्थापना और शुद्ध वैदिक हवन। 🏡 वास्तु शांति अनुष्ठान जिससे घर में हमेशा सकारात्मक ऊर्जा का वास रहे। 📦 पूजा सामग्री की पूरी व्यवस्था (आपकी सुविधानुसार)। अपने नए घर की शुरुआत को मंगलमय और शुभ बनाएं। आज ही अपना शुभ मुहूर्त देखकर पूजा बुक करें! पूजा सारथी के साथ ✨ इस पूजा में क्या-क्या शामिल है? (What's Included) जब आप हमारे ऐप से गृह प्रवेश पूजा बुक करते हैं, तो आपको एक पूर्ण और तनावमुक्त धार्मिक सेवा मिलती है। विद्वान एवं अनुभवी पंडित जी - शास्त्रों के ज्ञाता और गृह प्रवेश के वैदिक नियमों के विशेषज्ञ ब्राह्मण। द्वार पूजा एवं देहरी पूजन - मुख्य द्वार पर मंगल कलश के साथ शुभ प्रवेश। गौ पूजन (Optional) - सुख-समृद्धि के लिए पवित्र गाय और बछड़े का पूजन। वास्तु शांति पूजा एवं हवन - नए घर के वास्तु दोषों को मिटाने और सकारात्मक ऊर्जा के लिए यज्ञ/हवन। नवग्रह शांति एवं कलश स्थापना - सभी नौ ग्रहों की शांति और खुशहाली के लिए विशेष पूजन। सत्यनारायण कथा / सुंदरकांड पाठ - आप अपनी इच्छा के अनुसार गृह प्रवेश के साथ सत्यनारायण कथा या सुंदरकांड पाठ जोड़ सकते हैं। महाआरती एवं आशीर्वाद - पूजा के अंत में सपरिवार आरती और पंडित जी द्वारा मंगल आशीर्वाद। नए घर की इस नई शुरुआत में कोई कमी न रह जाए! अपने नए आशियाने को खुशियों और आशीर्वाद से भरने के लिए आज ही अपना शुभ मुहूर्त स्लॉट बुक करें।

1hr – 3hr
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Ganpati Sthapna (गणपति स्थापना पूजा) view 1Ganpati Sthapna (गणपति स्थापना पूजा) view 2
puja
भगवान गणेश

Ganpati Sthapna (गणपति स्थापना पूजा)

रिद्धि-सिद्धि का आगमन - भगवान गणेश अपने साथ रिद्धि (बुद्धि/ज्ञान) और सिद्धि (सफलता/समृद्धि) लेकर आते हैं। उनकी स्थापना से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। विघ्नों का नाश - बप्पा की उपस्थिति हर प्रकार की नकारात्मकता और रुकावटों को दूर करती है। भक्ति और उत्सव - यह पूजा केवल मंत्रोच्चार तक सीमित नहीं है; यह पूरे परिवार को एक साथ लाने, ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ खुशियां मनाने का एक जरिया है। ✨ इस पूजा में क्या-क्या शामिल है? (What's Included) जब आप हमारे ऐप से पूजा बुक करते हैं, तो आपको मिलती है एक पूर्ण और तनावमुक्त सेवा । विद्वान एवं अनुभवी पंडित जी - शास्त्रों के ज्ञाता और शुद्ध उच्चारण करने वाले ब्राह्मण। गणपति स्थापना एवं प्राण-प्रतिष्ठा - बप्पा की मूर्ति में साक्षात देवत्व का आवाहन। संपूर्ण पूजन विधि - संकल्प, गणेश अंबिका पूजन, कलश स्थापना, षोडशोपचार पूजन (16 चरणों की पूजा) और महाआरती। कथा एवं सस्वर पाठ - बप्पा की महिमा की पावन कथा और सुंदर स्त्रोतों का पाठ। पूजा सामग्री सूची (Checklist) - बुकिंग के तुरंत बाद आपको ऐप पर ही सामग्री की पूरी लिस्ट मिल जाएगी, ताकि कोई उलझन न रहे। 🌟 पूजा सारथी (Puja Sarthi) को ही क्यों चुनें? शास्त्रोक्त विधि: बिना किसी शॉर्टकट के, पूरी परंपरा और शुद्धता के साथ पूजन। समय की पाबंदी - पंडित जी आपके द्वारा चुने गए शुभ मुहूर्त पर सीधे आपके द्वार पहुंचेंगे। संतुष्टि की गारंटी - हजारों परिवारों का भरोसा और सात्विक वातावरण। विघ्नहर्ता के स्वागत में कोई कमी न रह जाए! इस पावन पर्व पर बप्पा का आशीर्वाद पाने के लिए आज ही अपना शुभ मुहूर्त स्लॉट सुरक्षित करें।

1hr – 3hr
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Rudrabhishek Puja Namak Chamak  view 1Rudrabhishek Puja Namak Chamak  view 2
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भगवान शिव

Rudrabhishek Puja Namak Chamak

रुद्राभिषेक का महत्व और इतिहास पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रुद्राभिषेक की शुरुआत स्वयं भगवान विष्णु ने की थी। जब उन्होंने शिव जी के तेज को शांत करने और उनके प्रति अपनी भक्ति प्रकट करने के लिए पवित्र नदियों के जल से उनका अभिषेक किया था। शास्त्रों में कहा गया है "सर्वदेवात्मको रुद्रः सर्वे देवाः शिवात्मकाः।" अर्थात, रुद्र सभी देवताओं की आत्मा हैं और सभी देवता शिव के ही अंश हैं। इसलिए शिव की पूजा करने से सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद स्वतः ही मिल जाता है। रुद्राभिषेक में अलग-अलग मनोकामनाओं के लिए अलग-अलग सामग्रियों (द्रव्यों) का उपयोग किया जाता है जो आगे वर्णित है। सम्पूर्ण सामग्री के साथ यह पूजा आप पूजा सारथी के वैदिक ब्राह्मणों द्वारा करा सकते हैं अभी बुक करें ।

2hr – 4hr
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Mahalakshmi KanakDhara Stotram Path  view 1Mahalakshmi KanakDhara Stotram Path  view 2
puja
माँ लक्ष्मी

Mahalakshmi KanakDhara Stotram Path

📖 इसके पीछे की अलौकिक कथा - एक बार आदिगुरु शंकराचार्य भिक्षा मांगते हुए एक अत्यंत निर्धन ब्राह्मण के घर पहुँचे। उस घर की वृद्ध महिला इतनी गरीब थी कि उसके पास भिक्षा में देने के लिए अन्न का एक दाना तक नहीं था। उसने पूरे घर में ढूंढा और अंत में उसे एक सूखा हुआ आंवला मिला। उसने अत्यंत संकोच और निश्छल भाव से वही आंवला शंकराचार्य के भिक्षापात्र में डाल दिया। महिला की इस निश्छल दानशीलता और घोर दरिद्रता को देखकर शंकराचार्य का हृदय करुणा से भर उठा। उन्होंने उसी क्षण माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए 21 श्लोकों की एक अत्यंत सुंदर स्तुति गाई। उनकी इस निश्छल भक्ति से प्रसन्न होकर माँ लक्ष्मी ने उस कुटिया में सोने के आंवलों की वर्षा कर दी। तभी से यह स्तोत्र 'कनकधारा स्तोत्रम्' के नाम से विख्यात हुआ। पूजा सारथी (Puja Sarthi) के साथ लाएं अपने घर में समृद्धि शास्त्रों के अनुसार, कनकधारा स्तोत्र का पूर्ण फल तभी मिलता है जब इसका पाठ सही विधि-विधान, शुद्ध उच्चारण और सिद्ध कनकधारा यंत्र के सामने किया जाए। यदि आप भी अपने घर या व्यापार स्थल पर माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा चाहते हैं, तो Puja Sarthi के अनुभवी और विद्वान ब्राह्मणों के माध्यम से विशेष लक्ष्मी पूजन, कनकधारा पाठ का आयोजन करवा सकते हैं। "शुद्ध मंत्रोच्चार और संपूर्ण विधि-विधान, यही है पूजा सारथी का संकल्प।" आज ही अपनी पूजा बुक करें।

2hr – 4hr
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Dhanteras Puja view 1Dhanteras Puja view 2
puja
माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि एवं कुबेर जी

Dhanteras Puja

धनतेरस पूजा का महत्व (Significance) धनतेरस के दिन मुख्य रूप से तीन देवताओं की पूजा की जाती है, जिनका अपना-अपना विशेष महत्व है भगवान धन्वंतरी पूजन - परिवार के उत्तम स्वास्थ्य और निरोगी काया के लिए विशेष आयुर्वेद देव की पूजा। माता लक्ष्मी एवं कुबेर देव पूजन - व्यापार में वृद्धि, धन-धान्य की प्रचुरता और तिजोरी में बरकत के लिए विशेष महालक्ष्मी-कुबेर अर्चना। यम दीपम अनुष्ठान - अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और परिवार की रक्षा के लिए शाम के समय यमराज के निमित्त दीपदान की सही विधि। भगवान धन्वंतरी (Arogya): पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरी अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। वे देवताओं के वैद्य और आयुर्वेद के जनक हैं। इस दिन उनकी पूजा अच्छे स्वास्थ्य और निरोगी काया के लिए की जाती है। माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर (Wealth & Prosperity): धनतेरस पर धन के देवता कुबेर और सुख-समृद्धि की देवी लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है, ताकि घर में कभी धन-धान्य की कमी न हो। सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य के इस पावन पर्व पर, आपकी पूजा और अनुष्ठानों को संपूर्ण और विधि-विधान से पूरा करने के लिए आपका अपना डिजिटल पार्टनर, पूजा सारथी हमेशा आपके साथ है। विद्वान एवं अनुभवी आचार्य - हमारी टीम में केवल वही ब्राह्मण और पंडित शामिल हैं जिन्हें वैदिक मंत्रोच्चार, शास्त्रोक्त पूजा विधियों और शुभ मुहूर्तों का गहन ज्ञान है। व्यावसायिक प्रतिष्ठान (ऑफिस/दुकान) पूजा - यदि आप अपने बिजनेस, ऑफिस या दुकान में धनतेरस की विशेष पूजा और बही-खाता/लॉकर पूजन करवाना चाहते हैं, तो हमारे पंडित जी आपके संस्थान में आकर विशेष अनुष्ठान संपन्न कराएंगे। आज ही अपनी पूजा बुक करें पूजा सारथी के साथ।

1hr – 2hr
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Somvar Vrit Udhyapan Puja view 1Somvar Vrit Udhyapan Puja view 2
puja
भगवान शिव

Somvar Vrit Udhyapan Puja

✨ इस पावन अनुष्ठान में क्या-क्या शामिल है? (What's Included) जब आप हमारे ऐप से सोमवार व्रत उद्यापन बुक करते हैं, तो आपको एक अत्यंत दिव्य और व्यवस्थित सेवा मिलती है: वेदांती एवं विद्वान पंडित जी: भगवान शिव की पूजा पद्धतियों और उद्यापन विधि के विशेषज्ञ ब्राह्मण। गौरी-गणेश एवं नवग्रह पूजन: अनुष्ठान की निर्विघ्न पूर्णता के लिए प्रथम पूजन। शिव-पार्वती दिव्य अभिषेक: साक्षात उमा-महेश्वर का दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, गंगाजल और गन्ने के रस से सस्वर महाअभिषेक। उद्यापन कथा एवं हवन: सोमवार व्रत की महिमा की पावन कथा का श्रवण और मंत्रों के साथ अग्नि देव के माध्यम से महादेव तक आहुति पहुँचाना। ब्राह्मण/सोलह दंपत्ति भोजन: शास्त्रों के नियम अनुसार ब्राह्मणों या दंपत्तियों को आदरपूर्वक भोजन, वस्त्र और सुहाग सामग्री दान कराने की संपूर्ण विधि। 🌟 पूजा सारथी (Puja Sarthi) को ही क्यों चुनें? मर्यादित एवं शुद्ध आचरण: बिना किसी शॉर्टकट के, हर नियम और परंपरा का पूर्ण पालन। तनावमुक्त अनुभव: बुकिंग के तुरंत बाद आवश्यक सामग्री और दान-दक्षिणा की पूरी सूची आपके ऐप पर आ जाएगी, जिससे आपकी तैयारी बेहद आसान हो जाएगी। "नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्॥" अपनी महीनों की तपस्या को सफल बनाएं और माता पार्वती व देवाधिदेव महादेव का अखंड सौभाग्य व समृद्धि का आशीर्वाद पाएं। आज ही अपना उद्यापन शुभ मुहूर्त स्लॉट बुक करें। अभी उद्यापन अनुष्ठान बुक करें। पूजा सारथी के साथ।

1hr – 2hr
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Kalsarp Dosh Nivaran Puja view 1Kalsarp Dosh Nivaran Puja view 2
puja
भगवान शिव और नाग देवता

Kalsarp Dosh Nivaran Puja

पूजा का मुख्य उद्देश्य और महत्व ​इस विशेष पूजा का उद्देश्य राहु-केतु के अशुभ प्रभावों को कम करना और नवग्रहों की कृपा प्राप्त करना है। मुख्य रूप से इस पूजा में निम्नलिखित अनुष्ठान किए जाते हैं। ​भगवान शिव की आराधना - शिवजी को काल (समय) का स्वामी और नागों का देवता माना जाता है। इसलिए इस पूजा में महामृत्युंजय मंत्र और शिवलिंग का अभिषेक मुख्य भूमिका निभाता है। ​नाग-नागिन के जोड़े का पूजन - चांदी या तांबे के नाग-नागिन के जोड़े की पूजा कर उन्हें नदी में प्रवाहित किया जाता है, जिससे सर्प दोष और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। ​ग्रह शांति - राहु और केतु के मंत्रों का जाप कर उन्हें शांत किया जाता है ताकि जीवन में आ रहे उतार-चढ़ाव थमें। कालसर्प दोष से डरने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि ज्योतिष में इसे एक 'योग' भी माना गया है जो संघर्ष के बाद व्यक्ति को फर्श से अर्श पर ले जाता है। सही समय पर (जैसे कि नागपंचमी, शिवरात्रि या अमावस्या के दिन) योग्य विद्वान पंडितों द्वारा कराई गई यह पूजा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सौभाग्य और सफलता के नए द्वार खोलती है।

2hr – 3hr
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माँ दुर्गा (नवदुर्गा)

Kalash Sthapna Puja

"जब मां चौखट पर आएं, तो तैयारी में कोई कमी न रह जाए..." कलश स्थापना हमारे शास्त्रों में सबसे मंगलकारी अनुष्ठान माना गया है, जो घर से हर नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर देता है। इस पावन अवसर पर अपनी व्यस्त दिनचर्या को अपनी भक्ति के आड़े न आने दें। 'पूजा सारथी' के माध्यम से आपके घर आ रहे हैं साक्षात सनातन संस्कारों के सारथी—हमारे योग्य पंडित जी। सामग्री से लेकर संकल्प तक, सब कुछ होगा एकदम परफेक्ट। आप बस साफ मन से प्रार्थना कीजिए, व्यवस्था हम संभाल लेंगे। ⏳ शुभ मुहूर्त के स्लॉट्स तेज़ी से बुक हो रहे हैं! आज ही अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए कलश स्थापन बुक करें। घर बैठे पाएं संपूर्ण कलश स्थापना का पुण्य—बिना किसी भागदौड़ के! शुभ कार्य की शुरुआत में सामग्री की लिस्ट बनाना, बाजार के चक्कर काटना और सही मुहूर्त के लिए योग्य पंडित जी को ढूंढना... अब इन सब की चिंता छोड़िए। 'पूजा सारथी' आपके लिए लाया है पूर्णतः प्रामाणिक और चिंतामुक्त कलश स्थापन पूजा सेवा। आपको क्या मिलेगा? 🌟 विद्वान एवं अनुभवी पंडित जी: जो पूरी वैदिक रीति-रिवाज और शुद्ध उच्चारण के साथ पूजा संपन्न कराएंगे। 🌾 100% शुद्ध एवं पवित्र सामग्री: गंगाजल, सप्तधान्य, आम के पल्लव से लेकर कलावा और नारियल तक—सब कुछ हम लाएंगे। ⏰ सटीक शुभ मुहूर्त: आपके स्थान और तिथि के अनुसार सबसे सटीक मुहूर्त पर पूजा की शुरुआत। आपके घर में दैवीय सकारात्मकता और समृद्धि का वास कराने की ज़िम्मेदारी अब हमारी है। मुहूर्त सीमित हैं, अपनी आस्था में देर न करें। 👇 अभी अपनी पूजा बुक करें

1hr – 2hr
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Bhumi pujan (नींवधारण) पूजा view 1Bhumi pujan (नींवधारण) पूजा view 2
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भूमि देवी

Bhumi pujan (नींवधारण) पूजा

🏗️ भूमि पूजन एवं शिलान्यास संस्कार (Foundation Stone Ceremony) नया घर, दुकान, फैक्ट्री या कोई भी बहुमंजिला इमारत बनाना किसी भी इंसान के जीवन का सबसे बड़ा सपना और उपलब्धि होती है। सनातन हिंदू परंपरा में निर्माण कार्य शुरू करने से पहले उस जमीन की प्रार्थना और वंदन करने का विधान है, जिसे 'भूमि पूजन' या 'शिलान्यास' कहा जाता है। इस पावन अनुष्ठान में मुख्य रूप से धरती माता (भूमि देवी) और वास्तु पुरुष का विधि-विधान से पूजन किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जब हम पृथ्वी से खुदाई कर नींव (Foundation) डालते हैं, तो धरती माता को होने वाले कष्ट के लिए क्षमा मांगी जाती है। साथ ही, भूमि के नीचे छिपी किसी भी प्रकार की नकारात्मकता या अदृश्य दोषों को शांत करने के लिए पवित्र कलश, पंचरत्न, शेषनाग और कछुए की प्रतीकात्मक प्रतिमा का पूजन कर उसे नींव में स्थापित किया जाता है। भूमि पूजन हमेशा शुभ तिथि, नक्षत्र और गृहस्वामी की कुंडली के अनुसार 'शुभ मुहूर्त' में ही किया जाना चाहिए। अपनी जमीन का सटीक मुहूर्त जाने और पूजा सारथी पर बुकिंग करें।

1hr – 2hr
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Rudrabhishek Puja view 1Rudrabhishek Puja view 2
puja
भगवान शिव

Rudrabhishek Puja

सनातन परंपरा में रुद्राभिषेक को भगवान शिव की आराधना का सबसे अचूक और शक्तिशाली माध्यम माना गया है। 'रुद्र' भगवान शिव का ही एक प्रचंड और कल्याणकारी रूप हैं। शुक्ल यजुर्वेद के 'रुद्राष्टाध्यायी' के दिव्य मंत्र के सस्वर पाठ के साथ शिवलिंग पर विभिन्न पवित्र द्रव्यों की अविरल धारा अर्पित करने की प्रक्रिया को ही रुद्राभिषेक कहते हैं। शास्त्रों के अनुसार, जल की बूंद-बूंद से संतुष्ट होने वाले आशुतोष भगवान शिव का जब मंत्रोच्चार के साथ अभिषेक किया जाता है, तो वे यजमान के समस्त कष्टों को तत्क्षण हर लेते हैं। अपने घर या कार्यालय में सकारात्मक ऊर्जा और शिव आशीर्वाद का आवाहन करें। 'पूजा सारथी' के इस विशेष रुद्राभिषेक सेक्शन में आपको मिलेगी वैदिक विद्वानों द्वारा प्रमाणित संपूर्ण पूजन सामग्री की लिस्ट, स्टेप-बाय-स्टेप विधि और विभिन्न द्रव्यों का महत्व। शास्त्रों के शुद्ध नियमों के अनुसार महादेव का अभिषेक संपन्न कराने के लिए आज ही हमारे वेदमूर्ति ब्राह्मणों को बुक करें।" रुद्राभिषेक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अलग-अलग मनोकामनाओं के लिए अलग-अलग द्रव्यों (तरल पदार्थों) से अभिषेक किया जाता है: 🕉️ पूजा सारथी आश्वासन: रुद्राभिषेक एक अत्यंत गूढ़ और ध्वन्यात्मक (Sound-based) अनुष्ठान है, जिसमें मंत्रों के सही उच्चारण का विशेष महत्व है। 'पूजा सारथी' के माध्यम से बुक किए गए सभी वैदिक ब्राह्मण शुक्ल यजुर्वेद के सस्वर पाठ में पारंगत हैं, जो आपके घर में साक्षात् कैलाश जैसा दिव्य वातावरण निर्मित करते हैं। गाय का कच्चा दूध: उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और संतान सुख की प्राप्ति के लिए। गन्ने का रस: आर्थिक तंगी दूर करने, व्यवसाय में वृद्धि और लक्ष्मी जी की स्थायी कृपा के लिए। शहद या शुद्ध घी: मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि और गंभीर रोगों से मुक्ति के लिए। गंगाजल: मोक्ष की प्राप्ति, मानसिक शांति और संचित पापों के नाश के लिए। सरसों का तेल: शत्रु बाधा से मुक्ति, मुकदमों में विजय और शनि/राहू जनित दोषों की शांति के लिए। पंचामृत: सर्वसुख, ऐश्वर्य और पारिवारिक खुशहाली के लिए।

1hr – 3hr
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माँ गौरी

Gauri Pujan

सनातन धर्म में विवाह को मात्र एक सामाजिक समझौता नहीं, बल्कि जन्म-जन्मांतर का पवित्र आत्मिक बंधन माना गया है। इस नए जीवन की शुरुआत से ठीक पहले, कन्या द्वारा किया जाने वाला गौरी पूजन (कई क्षेत्रों में इसे गौरी-हरहर, देवक या मंगला गौरी पूजन भी कहते हैं) सबसे महत्वपूर्ण और भावपूर्ण अनुष्ठान है। यह पूजा कन्या द्वारा अपने भावी दांपत्य जीवन की सुख-शांति, पति की दीर्घायु और दोनों परिवारों की समृद्धि के लिए माता पार्वती (गौरी जी) के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने और उनका आशीर्वाद लेने का माध्यम है। पूजन का धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व अखंड सौभाग्य की कामना: माता पार्वती ने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था। कन्याएं उन्हें अपना आदर्श मानकर सुयोग्य पति और अखंड सौभाग्य का वरदान मांगती हैं। विदाई की बेला और कृतज्ञता: यह अनुष्ठान कन्या के मायके में उसकी अंतिम मुख्य पूजाओं में से एक होता है, जहाँ वह अपने माता-पिता के घर की खुशहाली की प्रार्थना भी करती है। मानसिक सुदृढ़ता: नए घर और नए माहौल में प्रवेश करने से पहले, यह पूजा कन्या को आत्मिक बल, धैर्य और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। वेदी निर्माण व स्थापना: पूजा के स्थान को स्वच्छ करके गोबर या शुद्ध मिट्टी से लीपकर चौक पूरा जाता है। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता गौरी की प्रतिमा या मिट्टी से बनी गौरी जी की स्थापना की जाती है। संकल्प: कन्या हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर पंडित जी की उपस्थिति में सुखी दांपत्य जीवन के लिए व्रत/पूजा का संकल्प लेती है। शोडषोपचार पूजन: माता को पंचामृत से स्नान कराया जाता है। इसके बाद वस्त्र, मौली, चंदन, कुमकुम, सिंदूर, और अक्षत अर्पित किए जाते हैं। सुहाग सामग्री अर्पण: इस पूजा का सबसे मुख्य भाग है माता को सुहाग की पिटारी (मेहंदी, चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, काजल, कंघी आदि) चढ़ाना। कथा व आरती: गौरी पूजन की पौराणिक कथा सुनी जाती है और कपूर व घी के दीपक से माता की आरती उतारी जाती है। आशीर्वाद व विसर्जन: अंत में कन्या माता के चरण स्पर्श कर अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद लेती है।

1hr – 2hr
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Satyanarayan Katha (श्री सत्यनारायण पूजा) view 1Satyanarayan Katha (श्री सत्यनारायण पूजा) view 2
puja
भगवान सत्यनारायण (विष्णु)

Satyanarayan Katha (श्री सत्यनारायण पूजा)

भगवान सत्यनारायण की पूजा अत्यंत शुभ और फलदायी है। यह पूजा परिवार में सुख, समृद्धि और शांति लाती है। किसी भी मांगलिक कार्य या मनोकामना पूर्ति के लिए यह पूजा की जाती है।

1hr – 3hr
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New Bussiness Puja (नए व्यापार का पूजन) view 1New Bussiness Puja (नए व्यापार का पूजन) view 2
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भगवान गणेश और माँ लक्ष्मी

New Bussiness Puja (नए व्यापार का पूजन)

नए व्यावसायिक प्रतिष्ठान, ऑफिस, दुकान, शोरूम या स्टार्टअप की शुरुआत करते समय की जाने वाली पूजा को 'नव व्यापार आरंभ पूजा' या 'कमर्शियल इन्फ्रास्ट्रक्चर पूजा' कहा जाता है। सनातन परंपरा में किसी भी नए आर्थिक सफर को शुरू करने से पहले ईश्वर का आशीर्वाद लेना अनिवार्य माना गया है, ताकि बिजनेस में निरंतर तरक्की हो, धन की बरकत रहे और सभी प्रकार के विघ्न-बाधाएं दूर रहें। वास्तु दोष निवारण: जब कोई नई जगह (दुकान या ऑफिस) ली जाती है, तो वहां निर्माण या पूर्व के उपयोग के कारण कुछ नकारात्मक ऊर्जा हो सकती है। पूजा और भूमि शुद्धिकरण से वहां सकारात्मकता का संचार होता है। महालक्ष्मी और कुबेर देव का आह्वान: व्यापार का सीधा संबंध धन और समृद्धि से है। इसलिए धन की देवी लक्ष्मी और कोषाध्यक्ष कुबेर देव की स्थापना की जाती है ताकि पैसों की आवक (Cash Flow) हमेशा बनी रहे। विघ्न निवारण: भगवान गणेश प्रथम पूजनीय हैं। उनकी पूजा से व्यापार के संचालन में आने वाली कानूनी, आर्थिक या मैनपावर संबंधी बाधाएं दूर होती हैं। 🎯 सटीक मुहूर्त निर्धारण: हमारे ज्योतिषाचार्य आपके नाम और राशि के अनुसार व्यापार के लिए सबसे शुभ और लाभ का चौघड़िया/मुहूर्त निकालकर देते हैं। 📦 परेशानी मुक्त (Hassle-Free) अनुभव: आपको पूजा की सामग्री के लिए बाजार में भटकने की जरूरत नहीं है; "सामग्री सहित" पैकेज चुनकर आप निश्चिंत हो सकते हैं। 🎓 प्रामाणिक और अनुभवी आचार्य: हमारी टीम में केवल वही पंडित जी शामिल हैं जिन्हें वैदिक कर्मकांड का गहरा अनुभव और ज्ञान है। ✨ सारथी बेसिक (Basic)इसमें 1 विद्वान पंडित जी आएंगे, जो कलश स्थापना, मुख्य द्वार पूजन, गणपति-लक्ष्मी पूजन और आरती संपन्न कराएंगे। दुकानें, केबिन या वर्क-फ्रॉम-होम ऑफिस के लिए। 💎 सारथी स्टैंडर्ड (Standard)इसमें पंडित जी के साथ सम्पूर्ण शुद्ध पूजन सामग्री (रोली, कलावा, कलश, नारियल आदि) पूजा सारथी के ऐप से ऑर्डर कर सकते हैं। इसमें छोटा हवन भी शामिल है।मध्यम दुकानें, शोरूम और नए स्टार्टअप्स के लिए। 👑 सारथी प्रीमियम (Premium)2 या अधिक वरिष्ठ आचार्यों द्वारा विस्तृत महालक्ष्मी-कुबेर अनुष्ठान, पूर्ण वास्तु शांति, महाहवन, और पूरे परिसर का शुद्धिकरण।।बड़े कॉर्पोरेट ऑफिस, फैक्ट्रियां या नए बड़े आउटलेट्स के लिए। अभी अपनी पूजा बुक करें पूजा सारथी के साथ

1hr – 3hr
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Namakaran Sanskar  view 1Namakaran Sanskar  view 2
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भगवान गणेश

Namakaran Sanskar

एक नाम, जो जीवनभर की पहचान बनेगा। एक नाम, जिससे उसकी कामयाबी गूंजेगी। आइए, इस सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण संकल्प को बनाएं अत्यंत पावन।" एक नन्हे शिशु का जन्म केवल एक परिवार की खुशियों का विस्तार नहीं है, बल्कि इस संसार में एक नई आत्मा का आगमन है। माता-पिता के रूप में, आपका हर सपना अब उस नन्हीं हथेली की रेखाओं से जुड़ चुका है। जब यह नन्हा मेहमान आपके आंगन में अपनी पहली मुस्कान बिखेरता है, तब सनातन धर्म के अनुसार उसे समाज, संस्कृति और ब्रह्मांड से जोड़ने का सबसे पहला उत्सव होता है—'नामकरण संस्कार'। ऋषियों-मुनियों के अनुसार, व्यक्ति का नाम केवल व्यावहारिक जीवन के लिए नहीं, बल्कि उसके आध्यात्मिक, मानसिक और सामाजिक विकास के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। 'पूजा सारथी' ऐप के माध्यम से हम आपके इस बेहद निजी और भावुक पल को पूरी श्रद्धा, शुद्धता और दिव्य मंत्रों के साथ संपन्न कराने का संकल्प लेते हैं। 🌟 नामकरण संस्कार क्यों है इतना खास? (महत्व और विज्ञान) सनातन परंपरा में नामकरण केवल मनपसंद नाम रख देना नहीं है। इसके पीछे गहरा ज्योतिषीय और वैज्ञानिक आधार है: ध्वनि विज्ञान (Sound Vibrations) का प्रभाव: शास्त्रों के अनुसार, हर अक्षर की अपनी एक ऊर्जा और ध्वनि तरंग (Vibration) होती है। जब बच्चे को उसके जन्म-नक्षत्र के अनुकूल अक्षर से पुकारा जाता है, तो वह ध्वनि उसके मस्तिष्क और भाग्य पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। आयु और बुद्धि की वृद्धि: इस संस्कार में आयु, कीर्ति और बल की वृद्धि के लिए विशेष आहुतियां दी जाती हैं। वेदों के मंत्रों की शक्ति शिशु के रक्षा-कवच का काम करती है। माता-पिता का पहला कर्तव्य: शास्त्र कहते हैं कि बच्चे को एक सार्थक और तेजस्वी नाम देना माता-पिता का पहला धर्म है। यह नाम ही जीवनभर उसका आत्मविश्वास बनता है। पूजा सारथी' ही क्यों? आपकी खुशियों में हमारा समर्पण: मुहूर्त की अचूक गणना: हमारे ज्योतिषाचार्य बच्चे की जन्म कुंडली, तिथि, और नक्षत्र के आधार पर सबसे सटीक और शुभ मुहूर्त निकाल कर देते हैं। वेदाचार्य पंडितों का चयन: आपके क्षेत्र के सबसे प्रतिष्ठित और अनुभवी पंडित जी, जिन्हें संस्कारों का गहन ज्ञान हो। कस्टमाइज्ड पैकेजेस: आपकी आवश्यकता और बजट के अनुसार (सरल पूजा से लेकर भव्य यज्ञ और गृह शांति तक) हर तरह के विकल्प उपलब्ध। चिंतामुक्त अनुभव: बुकिंग से लेकर विदाई तक, पूजा की सामग्री की सही जानकारी और मार्गदर्शन हमारी जिम्मेदारी है, ताकि आप बिना किसी तनाव के अपने बच्चे के उत्सव का आनंद ले सकें। ✨ आपके घर के दीपक की लौ हमेशा जगमगाती रहे! आइए, आज ही 'पूजा सारथी' के साथ अपने बच्चे के नामकरण संस्कार को एक दिव्य और अविस्मरणीय स्मृति बनाएं। अभी बुक करें।

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भगवान गणेश

Annaprashan अन्नप्राशन संस्कार

अन्नप्राशन संस्कार का अर्थ और महत्व पहला ठोस आहार: यह बच्चे के जीवन का वह महत्वपूर्ण पल होता है जब वह पहली बार माँ के दूध के अलावा अन्य भोजन ग्रहण करता है। स्वास्थ्य और दीर्घायु - यह शिशु के अच्छे स्वास्थ्य, बुद्धि और लंबी उम्र के लिए किया जाने वाला एक अनुष्ठान है, जिसके द्वारा यह कामना की जाती है कि वह शुद्ध अन्न खाकर शुद्ध मन का हो । आहारशुद्धि - "आहारशुद्धौ सत्त्वशुद्धिः" के सिद्धांत के अनुसार, शुद्ध आहार से शरीर और मन मे सात्विक गुण बढ़ते हैं, और यह संस्कार इसी उद्देश्य से किया जाता है। धार्मिक परंपरा - यह 16 संस्कारों में से एक है और इसे शुभ मुहूर्त में, यज्ञ और देवताओं के पूजन के साथ संपन्न किया जाता है। समय सामान्यत - शिशु के 6 महीने पूरे होने पर, जब उसके दांत निकलने लगते हैं, तब यह संस्कार किया जाता है। प्रसाद: मुख्य रूप से चावल की खीर (दूध, चीनी / शहद, घी मिलाकर) या दलिया खिलाया जाता है। पवित्र सामग्री - शहद, घी, तुलसी दल और गंगाजल का प्रयोग भी होता है। प्रतीकात्मक वस्तुएँ - चांदी की कटोरी और चम्मच से भोजन कराया जाता है, जो स्वच्छता और समृद्धि का प्रतीक है और हाथो से भोजन कराने के बजाय संक्रमण से बचाता है। 🥣 अन्नप्राशन संस्कार पूजा: शिशु के पोषण और आरोग्य का उत्सव "अन्नाद्भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसंभवः..." (अर्थात्: संसार के सभी जीव अन्न से ही उत्पन्न होते हैं और अन्न से ही जीवित रहते हैं।) शिशु के जीवन के शुरुआती ६ महीने पूरी तरह माँ के दूध पर निर्भर होते हैं। लेकिन जैसे ही बच्चा ७वें महीने में प्रवेश करता है, उसके शरीर और मस्तिष्क को अधिक पोषण की आवश्यकता होती है। सनातन संस्कृति के १६ संस्कारों में 'अन्नप्राशन संस्कार' (जिसे आम भाषा में खीर चटाई या मुहूर्त भी कहते हैं) सातवां अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार है। यह संस्कार केवल बच्चे को पहली बार ठोस आहार खिलाने की रस्म नहीं है, बल्कि बच्चे के शारीरिक विकास, उत्तम स्वास्थ्य और शुद्ध चेतना की वैदिक शुरुआत है। 'पूजा सारथी' ऐप के माध्यम से हम इस बात को सुनिश्चित करते हैं कि आपके बच्चे का यह पहला निवाला दैवीय शक्तियों के आशीर्वाद और संपूर्ण पवित्रता के साथ उसके मुख में जाए। 🌟 अन्नप्राशन संस्कार का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व: पाचन तंत्र की शुद्धि (Scientific Aspect): विज्ञान भी मानता है कि ६ महीने के बाद शिशु का पेट ठोस आहार पचाने के लिए तैयार हो जाता है। इस पूजा में देवताओं को अर्पित की गई औषधियुक्त शुद्ध खीर चटाने से बच्चे का पाचन तंत्र (Digestive System) मजबूत होता है। अन्न दोष की मुक्ति (Spiritual Aspect): शास्त्रों के अनुसार, अन्न में एक ऊर्जा होती है। शिशु के मुख में जाने वाला पहला अन्न पूरी तरह शुद्ध, मंत्रपूत (मंत्रों द्वारा पवित्र किया गया) और दोषमुक्त होना चाहिए, ताकि बच्चे की बुद्धि और विचार सात्विक बनें। आयु, तेज और बल की वृद्धि: इस पूजा में अग्नि देव और अन्नपूर्णा माता से प्रार्थना की जाती है कि यह अन्न शिशु के शरीर में रक्त, मांस और मज्जा बनकर उसे अपार बल और तेज प्रदान करे। 🤝 'पूजा सारथी' ही क्यों? आपका भरोसा, हमारी जिम्मेदारी: सटीक शुभ मुहूर्त गणना: शास्त्रों के अनुसार लड़कों का अन्नप्राशन सम महीनों (६ठे, ८वें, १०वें महीने) में और लड़कियों का विषम महीनों (५वें, ७वें, ९वें महीने) में करना शुभ होता है। हमारे ज्योतिषाचार्य आपके बच्चे के लिए सबसे सटीक दिन और समय निकालकर देंगे। योग्य और सदाचारी पंडित जी: हमारे पंडित जी केवल पूजा नहीं कराते, बल्कि बच्चे के पहले भोजन से जुड़े शास्त्रों के नियमों और सावधानियों का पूरा मार्गदर्शन भी करते हैं। टेंशन-फ्री बुकिंग: पूजा की थाली से लेकर हवन की लकड़ी तक, सभी आवश्यक और शुद्ध सामग्रियों का प्रबंध आप हमारे जरिए आसानी से कर सकते हैं। ✨ आपके बच्चे का पहला निवाला, उसके जीवन में खुशियों और सेहत का मार्ग प्रशस्त करे। आज ही 'पूजा सारथी' ऐप पर अन्नप्राशन संस्कार पूजा बुक करें!

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इष्ट देव

Happy Birthday Puja

🎂एक नया वर्ष, एक नई सुबह और ईश्वर का अनंत आभार "यह दिन सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं है, यह उत्सव है उस पल का जब इस संसार में आपके अस्तित्व की पहली गूंज सुनाई दी थी। यह पर्व है जीवन का, सांसों का और ईश्वर के उस असीम प्रेम का।" हर साल जब आपका जन्मदिन आता है, तो वह अपने साथ यादों का एक खूबसूरत कारवां और भविष्य की नई उम्मीदें लेकर आता है। विशेषकर जब घर के बच्चों का जन्मदिन हो, तो माता-पिता का दिल पुरानी यादों से भर जाता है—वो उनका पहली बार मुस्कुराना, वो नन्हीं उंगलियों से आपका हाथ थामना। इस अनमोल जीवन के लिए, इस अटूट ममता के लिए उस परमपिता परमेश्वर को धन्यवाद कहने का ही पावन माध्यम है 'जन्मोत्सव पूजा'। हमारी सनातन परंपरा सिखाती है कि जीवन के हर नए वर्ष की शुरुआत अंधेरे को मिटाकर होनी चाहिए। जहाँ हम आधुनिक तरीके से खुशियाँ मनाते हैं, वहीं सुबह के शांत और पवित्र माहौल में ईश्वर के सामने एक दीपक जलाकर, बड़ों के पैर छूकर आशीष लेना इस दिन को संपूर्ण बनाता है। 🌸 'पूजा सारथी' के साथ जोड़ें संस्कृति और खुशियों का बंधन: हम समझते हैं कि आपके और आपके परिवार के लिए यह दिन कितना भावनात्मक और अनमोल है। इसलिए, आपके नए साल के पहले दिन को सकारात्मक ऊर्जा और दिव्य आशीर्वाद से भरने के लिए पूजा सारथी पूरी निष्ठा से आपके साथ खड़ा है। ममता और कृतज्ञता का अर्पण: माँ-बाप के आशीर्वाद और भगवान के चरणों में सिर झुकाकर बीते साल की भूलों की क्षमा और आने वाले कल के वैभव की प्रार्थना। मार्कण्डेय ऋषि का आशीष (दीर्घायु): अष्टचिरंजीवियों (विशेषकर ऋषि मार्कण्डेय) का आह्वान, जो आपके बच्चे या प्रियजन को लंबी उम्र, तेज और चट्टान जैसा हौसला प्रदान करते हैं। सकारात्मक ऊर्जा का संचार: वेदों के दिव्य मंत्रों की गूंज से आपके घर का कोना-कोना और आपके अपनों का अंतर्मन शुद्ध और शांत हो जाता है। आइए, इस बार केक काटने और मोमबत्तियां बुझाने से पहले, ईश्वर की भक्ति का दीया जलाएं। अपने प्रियजनों के जीवन को सुरक्षित, समृद्ध और मंगलमयी बनाने के लिए आज ही एक सुंदर शुरुआत करें। "जिसने दी हैं ये अनमोल सांसें, चलो सबसे पहले उसका आभार जताएं। वैदिक विधि से अपना जन्मोत्सव मनाएं।" "बढ़ती उम्र के साथ बढ़े खुशियाँ और सम्मान, बड़ों का मिले आशीष और ईश्वर का वरदान। बुक करें आज की सबसे खास पूजा।"

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भगवान गणेश

Mundan Sanskar Puja

*चूड़ाकर्म संस्कार (या मुंडन संस्कार)* सनातन हिंदू धर्म के सोलह संस्कारों में से आठवां है, जिसमें शिशु के जन्म के बाद पहली बार सिर के बाल उतारे जाते हैं, जो स्वास्थ्य, शुद्धिकरण, बुद्धि वृद्धि, दीर्घायु और पिछले जन्म के अवांछित संस्कारों से मुक्ति का प्रतीक है, ताकि शिशु को निरोगी, तेजस्वी और यशस्वी बनाया जा सके, जिसमें अक्सर शिखा (छोटी चोटी) छोड़ी जाती है और वैदिक मंत्रों का जाप किया जाता है। *महत्व और उद्देश्य:* स्वास्थ्य: गर्भ के बालों को अशुद्ध माना जाता है; उन्हें हटाने से सिर की खुजली, फोड़े और जूँ जैसी समस्याओं से बचाव होता है और सिर हल्का व ठंडा रहता है। शुद्धि और नवीनीकरण: यह शिशु को शारीरिक और मानसिक शुद्धता प्रदान करता है, जिससे वह नई ऊर्जा के साथ जीवन की शुरुआत करता है। *बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास* : यह मस्तिष्क को पुष्ट करता है, बुद्धि, बल और तेज की वृद्धि करता है, और बच्चे को अच्छे संस्कारों की ओर प्रेरित करता है। दीर्घायु और समृद्धि: वेदों के अनुसार, यह संस्कार बालक की लंबी आयु, ऐश्वर्य और उत्तम संतान प्राप्ति के लिए किया जाता है। *प्रक्रिया और परंपरा:* समय: यह संस्कार शिशु के पहले, तीसरे, पांचवें या सातवें वर्ष में, किसी शुभ मुहूर्त में किया जाता है, अक्सर अन्नप्राशन संस्कार के बाद। *मुंडन:* शिशु के सिर के बाल पहली बार उस्तरे (क्षुर) से उतारे जाते हैं, जिससे गर्भजन्य अशुद्ध बाल हट जाते हैं। *शिखा:* सिर के बीच में थोड़े बाल छोड़े जाते हैं (शिखा), जिससे कॉस्मिक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और यह हिंदुत्व की पहचान भी है। *मंत्रोच्चार:* नाई द्वारा बाल उतारते समय वैदिक मंत्रों का जाप किया जाता है, और माता मन ही मन गायत्री मंत्र का जप करती है। *लेपन*: बाल उतारने के बाद सिर पर दूध, दही, घी और जल मिलाकर लेप लगाया जाता है, और चंदन या रोली से 'ॐ' या स्वस्तिक बनाया जाता है। *विसर्जन:* उतारे गए बालों को गोबर में लपेटकर या आटे के गोले में रखकर भूमि में गाड़ दिया जाता है या नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है, ताकि वे खाद बनकर धरती को उपजाऊ बनाएं। संक्षेप में, चूड़ाकर्म संस्कार शिशु के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है जो उसके शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए किया जाने वाला एक पवित्र अनुष्ठान है। यह संस्कार आप हमारे वैदिक विद्वानों के द्वारा करा सकते हैं

0hr 30min – 1hr
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मंगल ग्रह

Mangalik Dosh Nivaran Puja

🕉️ सम्पूर्ण मंगल दोष निवारण पूजा | गृह शांति और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए जब कुंडली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में मंगल स्थित होता है, तो मंगल दोष (जिसे मांगलिक दोष भी कहते हैं) का निर्माण होता है। मंगल को ऊर्जा, साहस और उग्रता का कारक माना जाता है। जब यह दोष अनियंत्रित होता है, तो जीवन के महत्वपूर्ण क्षेत्रों—विशेषकर विवाह, स्वभाव और करियर—में भारी उथल-पुथल मचा सकता है। 🔎 मंगल दोष के लक्षण: क्या आपको इस पूजा की आवश्यकता है? यदि आप या आपके परिवार का कोई सदस्य नीचे दी गई समस्याओं से जूझ रहा है, तो यह पूजा आपके लिए अत्यंत फलदायी सिद्ध होगी। विवाह में अत्यधिक विलंब: बनते-बनते रिश्ते टूट जाना या योग्य जीवनसाथी न मिल पाना। वैवाहिक जीवन में कलह: शादी के बाद पति-पत्नी में वैचारिक मतभेद, बेवजह का गुस्सा, अविश्वास या तलाक (Divorce) तक की नौबत आ जाना। स्वभाव में अत्यधिक उग्रता: बात-बात पर हिंसक हो जाना, अत्यधिक क्रोध आना या मानसिक अवसाद (Depression) रहना। रक्त संबंधी विकार: बार-बार चोट लगना, एक्सीडेंट होना या रक्त (Blood) से जुड़ी बीमारियां होना। भूमि व संपत्ति विवाद: जमीन-जायदाद के मामलों में नुकसान होना या भाई-बहनों से संबंध खराब होना। अत्यधिक कर्ज (ऋण): लगातार कोशिशों के बाद भी कर्ज के दलदल से बाहर न निकल पाना। पूजा सारथी ऐप आपके लिए लेकर आया है एक प्रामाणिक, पारदर्शी और पूर्णतः वैदिक समाधान। हमारे अनुभवी और ज्योतिषाचार्यों के मार्गदर्शन में आयोजित मंगल दोष निवारण महापूजा के जरिए आप इस दोष के नकारात्मक प्रभावों को पूरी तरह शांत कर सकते हैं। 🎓 प्रमाणित और संस्कारी ब्राह्मण: हमारे पास काशी, उज्जैन और हरिद्वार के शीर्ष गुरुकुलों से पढ़े हुए १०००+ से अधिक अनुभवी पंडितों का पैनल है। पूजा सारथी ऐप के माध्यम से की जाने वाली यह विशेष वैदिक पूजा मंगल ग्रह के नकारात्मक प्रभावों को शांत कर उन्हें शुभ फल में बदलती है।

2hr – 4hr
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पितृ देवता

Narayan Bali Puja

नारायण बलि पूजा क्या है? (What is Narayan Bali Puja?) 'नारायण बलि' दो शब्दों से मिलकर बना है— नारायण (भगवान विष्णु) और बलि (श्रद्धापूर्वक दिया जाने वाला अर्घ्य या भोग)। यह एक ऐसी विशेष विधि है जो किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी आत्मा को प्रेत योनि से मुक्ति दिलाकर पितृ योनि या मोक्ष की ओर ले जाने के लिए की जाती है। साधारण श्राद्ध या तर्पण से जब पितरों की तृप्ति नहीं हो पाती, तब भगवान नारायण के निमित्त यह विशेष पूजा संपन्न की जाती है। यह पूजा क्यों की जाती है? (Significance & Purpose) शास्त्रों के अनुसार, यह पूजा मुख्य रूप से दो स्थितियों में अनिवार्य मानी गई है: अकाल मृत्यु (Unnatural Death): यदि परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु दुर्घटना, बीमारी, आत्महत्या, हत्या, सांप के काटने या किसी भी प्रकार की असामयिक या अकाल परिस्थिति में हुई हो, तो उनकी आत्मा की शांति के लिए यह पूजा की जाती है। पितृ दोष और वंश वृद्धि में रुकावट: यदि किसी जातक की कुंडली में भारी 'पितृ दोष' हो, जिसके कारण: वंश आगे न बढ़ रहा हो (संतान प्राप्ति में लगातार बाधा)। व्यापार या नौकरी में लगातार नुकसान हो रहा हो। घर में अत्यधिक कलह और मांगलिक कार्यों में रुकावट आ रही हो। पूजा का मुख्य आधार (Core Ritual) चूंकि अकाल मृत्यु के कारण जीवात्मा प्रेत योनि में फंसी रह जाती है, इसलिए इस पूजा में भगवान विष्णु (नारायण) की प्रतिमा स्थापित कर उनकी विशेष आराधना की जाती है। इसमें प्रतीकात्मक रूप से कृत्रिम शव (कुश के पुतले) का निर्माण कर उसका पूरे शास्त्रोक्त विधि-विधान से अंतिम संस्कार और पिंड दान किया जाता है। मान्यता है कि नारायण बलि करने से स्वयं भगवान विष्णु उस जीवात्मा की जिम्मेदारी लेते हैं और उसे सब बंधनों से मुक्त कर देते हैं। मुख्य तीर्थ स्थल (Famous Spiritual Places) यद्यपि यह पूजा योग्य विद्वान ब्राह्मणों के मार्गदर्शन में स्थानीय शिव मंदिर या पवित्र नदी के तट पर भी संपन्न की जा सकती है, लेकिन शास्त्रों में इसके लिए कुछ विशेष तीर्थों को परम फलदायी माना गया है। पूजा सारथी विशेष संदेश: नारायण बलि पूजा एक अत्यंत संवेदनशील और उच्च स्तरीय वैदिक प्रक्रिया है। इसे केवल पूर्ण ज्ञानी, सदाचारी और कर्मकांडी पंडितों के द्वारा ही संपन्न कराया जाना चाहिए ताकि जातक और उसके परिवार को इसका संपूर्ण और सकारात्मक फल प्राप्त हो सके।

3hr – 5hr
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भगवान गणेश

Mool Shanti Puja

गंडमूल शांति पूजा – शिशु के सुरक्षित, समृद्ध और बाधा-रहित भविष्य का वैदिक संकल्प परिचय (Introduction) संतान का जन्म किसी भी परिवार के लिए सबसे बड़ा उत्सव और ईश्वर का सबसे सुंदर आशीर्वाद होता है। माता-पिता के रूप में, हमारा पूरा जीवन बच्चे की मुस्कान, उसकी सेहत और उसकी सफलता के इर्द-गिर्द घूमने लगता है। लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुछ विशेष नक्षत्रों में जन्म लेने के कारण बच्चे की कुंडली में 'गंडमूल दोष' का निर्माण होता है। अश्विनी, आश्लेषा, मघा, जेष्ठा, मूल और रेवती—इन 6 नक्षत्रों को गंडमूल नक्षत्र कहा जाता है। जब कोई शिशु इनमें से किसी नक्षत्र में जन्म लेता है, तो उसके स्वास्थ्य, स्वभाव और भविष्य पर, साथ ही माता-पिता के जीवन पर इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है। 'पूजा सारथी' का मानना है कि सनातन धर्म में हर दोष का निवारण और हर समस्या का समाधान बेहद सरल और कल्याणकारी बताया गया है। गंडमूल शांति पूजा कोई डर नहीं, बल्कि आपके बच्चे के जीवन को सकारात्मकता, शांति और समृद्धि से भरने का एक पवित्र माध्यम है। एक माता-पिता का दिल हमेशा अपने बच्चे को दुनिया की हर बुरी नजर और हर संकट से बचाकर रखना चाहता है। गंडमूल शांति पूजा आपके उसी प्रेम और फिक्र को ईश्वर की प्रार्थना से जोड़ती है। पूजा की संपूर्ण विधि और प्रक्रिया (Ritual & Process) शास्त्रों के अनुसार, शिशु के जन्म के ठीक 27वें दिन (जब वही नक्षत्र दोबारा आता है) यह पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है। यदि किसी कारणवश उस समय यह न हो पाए, तो किसी भी शुभ मुहूर्त में इसे कराया जा सकता है। पूजा सारथी ऐप के माध्यम से यह पूजा पूरी तरह से प्रामाणिक विधि से संपन्न की जाती है। विशेष नक्षत्र देवता का पूजन: जिस नक्षत्र में बच्चे का जन्म हुआ है, उसके अधिपति देवता का विशेष मंत्रों द्वारा आवाहन और पूजन किया जाता है। 27 कुओं/नदियों का जल और 27 पत्तों का संचय: वैदिक परंपरा के अनुसार, इस पूजा में 27 अलग-अलग स्थानों के जल, मिट्टी और विभिन्न वृक्षों के पत्तों (जैसे आम, पीपल, गूलर आदि) का उपयोग करके औषधीय जल तैयार किया जाता है। महामृत्युंजय और नवग्रह शांति हवन: बच्चे की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और ग्रहों को शांत करने के लिए विशेष आहुतियां दी जाती हैं। शिशु और माता-पिता का अभिषेक: पूजा के अंत में तैयार किए गए पवित्र औषधीय जल से शिशु और माता-पिता का अभिषेक किया जाता है, जो उनके चारों ओर एक सुरक्षा कवच बनाता है। छाया दान और ब्राह्मण भोज: दोष निवारण के लिए कांसे के कटोरे में घी और सिक्का डालकर बच्चे का चेहरा देखा जाता है (छाया दान) और फिर योग्य ब्राह्मणों को भोजन व दान-दक्षिणा दी जाती है। पूजा सारथी के साथ ही क्यों जुड़ें? (The Puja Sarthi Promise) हम समझते हैं कि आपके बच्चे का भविष्य आपके लिए कितना अनमोल है। इसलिए पूजा सारथी आपकी आस्था और भरोसे का पूरा सम्मान करता है। विद्वान एवं अनुभवी पंडित: हमारी ऐप पर मौजूद सभी आचार्य और पंडित वैदिक शास्त्रों के प्रकांड विद्वान हैं, जिन्हें गंडमूल शांति अनुष्ठान का वर्षों का अनुभव है। शुद्ध और प्रामाणिक सामग्री: पूजा में उपयोग होने वाली हर एक सामग्री (जैसे 27 तरह की जड़ी-बूटियाँ, शुद्ध घी, हवन सामग्री) पूरी तरह से शुद्ध और शास्त्रोक्त होती है। पारदर्शी और सुविधाजनक: आप अपने घर पर इस पूजा का आयोजन बेहद आसानी से बुक कर सकते हैं। मुहूर्त से लेकर सामग्री की व्यवस्था तक, हर जिम्मेदारी हमारी है। "अपने नन्हे तारे के जीवन से हर अंधकार को दूर करें। आज ही 'पूजा सारथी' ऐप के माध्यम से गंडमूल शांति पूजा का संकल्प लें और उसके सुरक्षित व सुनहरे कल की नींव रखें।"

2hr – 4hr
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माँ दुर्गा

Mata Ki Chauki (Sangeet) Jagaran

संगीतमय भजन संध्या की मुख्य विशेषताएं (What Makes it Special?) भक्ति और संगीत का अद्भुत संगम: पारंपरिक ढोलक, मंजीरे, पैड, और कीबोर्ड की जुगलबंदी के साथ जब मां के प्राचीन और आधुनिक भजनों की गंगा बहती है, तो उपस्थित हर भक्त खुद को मां के दरबार में बैठा हुआ महसूस करता है। दिव्य दरबार और अलौकिक श्रृंगार: संगीतमय चौकी का आकर्षण केवल भजनों तक सीमित नहीं होता। गेंदे, गुलाब और विदेशी फूलों से सजा मां का भव्य दरबार, अखंड ज्योति का प्रकाश और छप्पन भोग की थाली पूरे वातावरण को साक्षात साक्षात् शक्तिपीठ जैसा स्वरूप दे देती है। तनाव से मुक्ति, सकारात्मकता का वास: भजनों की गूंज और मां के जयकारों से घर की हर नकारात्मक ऊर्जा दूर भागती है और परिवार में सुख, शांति, आपसी प्रेम व समृद्धि का संचार होता है। पूजा सारथी का दिव्य संकल्प (The Puja Sarthi Promise) *"हम समझते हैं कि माता की चौकी आपके परिवार के लिए कितनी बड़ी आस्था का विषय है। इसलिए 'पूजा सारथी' आपके लिए लेकर आया है दिल्ली-NCR के सबसे प्रतिष्ठित, सुरीले और मँजे हुए भजन गायकों (Bhajan Singers) और वादकों की मंडली। साउंड सिस्टम (PA System)1 कम्प्लीट सेटजेबीएल/कस्टम टॉप्स, मॉनिटर्स और एम्पलीफायर्स कॉर्डलेस एवं स्टैंड माइक्स3 से 4 पीसमुख्य सिंगर्स और कोरस के लिए इंस्ट्रूमेंट्स (वाद्ययंत्र)1 सेट ढोलक भव्य दरबार की सजावट से लेकर, शुद्ध पूजा सामग्री, अखंड ज्योति की व्यवस्था, तारा रानी की कथा और विधि-विधान से पूजा कराने वाले पंडित जी तक—हर छोटी-बड़ी जिम्मेदारी हमारी होगी। आपको बस पूरी श्रद्धा के साथ मां के स्वागत की तैयारी करनी है।"* 🌟 "चलो बुलावा आया है, माता ने बुलाया है! अपने घर के हर शुभ प्रसंग को बनाएं यादगार। 'पूजा सारथी' के साथ बुक करें भव्य संगीतमय माता की चौकी और भजनों की सुरीली शाम।"

3hr – 6hr
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माँ सरस्वती

Saraswati Puja

सरस्वती पूजा – विद्या, कला, वाणी और बुद्धि के उत्कर्ष का महा-अनुष्ठान सनातन धर्म में मां सरस्वती को ज्ञान, बुद्धि, विवेक, कला, विज्ञान और वाणी की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। सृष्टि के प्रारंभ में जब ब्रह्मा जी ने जीव-जंतुओं और मनुष्यों की रचना की, तब चारों ओर एक मौन और उदासी छाई हुई थी। इस नीरसता को दूर करने के लिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे हाथों में वीणा, पुस्तक, माला और वरद मुद्रा धारण किए मां सरस्वती प्रकट हुईं। जैसे ही मां ने वीणा के तारों को झंकृत किया, संसार के समस्त जीवों को वाणी, नदियों को कलकल ध्वनि और हवा को सरसराहट मिली। मुख्य रूप से माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी (जिसे बसंत पंचमी कहा जाता है) को मां सरस्वती का प्राकट्य दिवस मानकर यह पूजा पूरे भारत में अत्यंत हर्षोल्लास के साथ की जाती है। इसके अलावा आश्विन नवरात्र में भी सरस्वती आवाहन का विधान है। सरस्वती पूजा का वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक महत्व (Scientific Benefit) सरस्वती पूजा केवल एक पारंपरिक कर्मकांड नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक आधार है। एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता: मां सरस्वती के मंत्रों (जैसे मेधा सूक्तम और सरस्वती गायत्री) की ध्वनि तरंगें हमारे मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को सक्रिय करती हैं, जिससे मानसिक तनाव दूर होता है और एकाग्रता (Focus) बढ़ती है। सकारात्मक दृष्टिकोण (Optimism): बसंत ऋतु में प्रकृति अपना चोला बदलती है। इस समय की जाने वाली पूजा मन में नई ऊर्जा, उमंग और रचनात्मक विचारों (Creative Thoughts) का संचार करती है। पीले रंग का विज्ञान: इस दिन पीले वस्त्र, पीले फूल और पीले पकवानों का उपयोग किया जाता है। मनोवैज्ञानिक रूप से पीला रंग हमारे नर्वस सिस्टम को उत्तेजित करता है, मानसिक स्पष्टता बढ़ाता है और उत्साह का प्रतीक माना जाता है। सरस्वती पूजा के अंतर्गत कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण अनुष्ठान किए जाते हैं, जिन्हें आप 'पूजा सारथी' ऐप के माध्यम से कस्टमाइज़ कर सकते हैं। विद्यारंभ संस्कार (अक्षर अभ्यास): 2 से 5 वर्ष के छोटे बच्चों को पहली बार शिक्षा या कला के क्षेत्र में उतारने के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। पंडित जी बच्चे की उंगली पकड़कर स्लेट या चावल की ढेरी पर 'ॐ', 'श्री' या पहला अक्षर लिखवाते हैं। पुस्तकों और वाद्ययंत्रों का पूजन: इस दिन छात्र अपनी मुख्य पुस्तकें, कलम और कलाकार अपने वाद्ययंत्र (हारमोनियम, गिटार, घुंघरू) या तूलिका (पेंटिंग ब्रश) मां के चरणों में रखकर पूजा करते हैं और उस दिन पढ़ाई या अभ्यास से विराम लेकर मां का ध्यान करते हैं। मेधा सूक्तम पाठ: बुद्धि, तीक्ष्ण स्मरण शक्ति और तार्किक क्षमता (Logical Thinking) बढ़ाने के लिए आचार्यों द्वारा ऋग्वैदिक 'मेधा सूक्तम' का विशेष पाठ किया जाता है, जो परीक्षाओं में सफलता के लिए अत्यंत फलदायी है। यह पूजा किसे अवश्य करानी चाहिए? (Who Should Book?) विद्यार्थी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र: एकाग्रता बढ़ाने, परीक्षा का डर दूर करने और सफलता प्राप्ति के लिए। कलाकार, संगीतकार, लेखक और पत्रकार: रचनात्मकता, सुंदर कल्पनाशीलता और वाणी में मधुरता व प्रखरता लाने के लिए। छोटे बच्चों के माता-पिता: अपने बच्चों के सुनहरे शैक्षणिक जीवन की शुरुआत (विद्यारंभ) करने के लिए। शिक्षण संस्थान और कॉरपोरेट ऑफिस: स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटर या ऑफिस में सकारात्मक और बौद्धिक वातावरण के निर्माण के लिए। 6. पूजा सारथी का भरोसा (The Puja Sarthi Promise) मां सरस्वती की कृपा तभी फलीभूत होती है जब पूजा पूरी शुद्धता और सही मंत्रोच्चार के साथ हो। 'पूजा सारथी' आपको विश्वास दिलाता है। योग्य वैदिक पंडित: हमारे सभी आचार्य संस्कृत और कर्मकांड के ज्ञाता हैं, जो मंत्रों का सटीक उच्चारण करते हैं। पूर्ण सामग्री किट: पीले वस्त्र, अष्टगंध, विशेष जड़ी-बूटियों से लेकर ताजे पत्तों तक की व्यवस्था हमारी टीम करेगी। समय और सुविधा: आपकी सुविधानुसार आपके घर, स्कूल या कार्यस्थल पर नियत शुभ मुहूर्त में पूजा संपन्न कराई जाएगी। "अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर अपने घर और संस्थान को ज्ञान के दिव्य प्रकाश से आलोकित करें। आज ही 'पूजा सारथी' ऐप के माध्यम से संपूर्ण सरस्वती पूजा बुक करें और मां वाग्देवी का अटूट आशीष पाएं।"

1hr – 3hr
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भगवान शिव

Laghu Rudra Puja

लघु रुद्र पूजा एक सकाम पूजा (Sakama Puja) है। सकाम का अर्थ होता है—"किसी विशेष इच्छा, मनोकामना या संकल्प की पूर्ति के लिए की जाने वाली पूजा।" जब कोई भक्त निष्काम (बिना किसी इच्छा के केवल मोक्ष या भक्ति के लिए) नहीं, बल्कि जीवन की किसी विशेष समस्या को दूर करने या किसी बड़ी सफलता को पाने के लिए महादेव की शरण में जाता है, तो उसे सकाम अनुष्ठान कहते हैं। सकाम अनुष्ठान - विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए लघु रुद्र पूजा लघु रुद्र पूजा में भगवान शिव के 'रुद्र रूप' का अभिषेक अलग-अलग पवित्र द्रव्यों (Materials) से किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जिस विशेष कामना (सकाम भावना) से अभिषेक किया जाता है, वैसी ही फल की प्राप्ति होती है: धन-धान्य और लक्ष्मी प्राप्ति के लिए: गन्ने के रस (Ikshu Rasa) या शहद से महादेव का अभिषेक करने से दरिद्रता दूर होती है और व्यापार व घर में समृद्धि आती है। गंभीर रोगों से मुक्ति और उत्तम स्वास्थ्य के लिए: कुशा (एक प्रकार की पवित्र घास) के जल से या शुद्ध घी से अभिषेक करने से अकाल मृत्यु का भय टलता है और असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है। संतान प्राप्ति व कुल वृद्धि के लिए: गाय के दूध से निरंतर अभिषेक करने से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है और वंश आगे बढ़ता है। शत्रु बाधा और मुकदमों में विजय के लिए: सरसों के तेल (Sarson Ka Tel) से शिवजी का अभिषेक करने से शत्रुओं का पराभव होता है और कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता मिलती है। ग्रह शांति और सुख-शांति के लिए - गंगाजल या सुगंधित इत्र मिले जल से अभिषेक करने से जन्मकुंडली के क्रूर ग्रह (जैसे शनि, राहु, केतु) शांत होते हैं और मानसिक शांति मिलती है। ### यह पूजा किन परिस्थितियों में (सकाम रूप से) विशेष फलदायी है? अगर नीचे दी गई किसी भी समस्या से जूझ रहे हैं, तो वे इस पूजा का संकल्प ले सकते हैं। व्यापार में लगातार घाटा या नौकरी में रुकावट आने पर। विवाह में अत्यधिक विलंब या वैवाहिक जीवन में तनाव होने पर। घर में बार-बार बीमारी या नकारात्मक ऊर्जा महसूस होने पर। शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या कालसर्प दोष के निवारण के लिए। आपकी जो भी सकाम इच्छा (मनोकामना) हो, हमारे आचार्य पूजा की शुरुआत में आपके नाम और गोत्र के साथ उसी विशिष्ट कार्य का 'संकल्प' दिलाकर इस दिव्य लघु रुद्र अनुष्ठान को संपन्न करेंगे।"

1hr – 4hr
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भगवान राम

Ramayan path (Akhand)

📖 'पूजा सारथी' अखण्ड श्री रामचरितमानस पाठ - भक्ति, शक्ति और सनातन संस्कृति का महापर्व 📖 सियावर रामचंद्र की जय! पवनसुत हनुमान की जय! 🙏 सनातन धर्म में प्रभु श्री राम का चरित्र केवल एक राजा की गाथा नहीं, बल्कि जीवन जीने का सर्वश्रेष्ठ आदर्श है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित 'श्री रामचरितमानस' एक ऐसा अद्भुत ग्रंथ है, जिसकी हर चौपाई अपने आप में एक सिद्ध मंत्र है। 'पूजा सारथी' अत्यंत हर्ष और गौरव के साथ, सनातन परंपरा को अक्षुण्ण रखते हुए, वेदमूर्ति और प्रकांड विद्वान वैदिक ब्राह्मणों के सानिध्य में 24 घंटे का अखण्ड श्री रामचरितमानस पाठ लेकर आया है। हमारा उद्देश्य आधुनिकता की दौड़ में आपके घर और जीवन को अध्यात्म, शांति और ईश्वरीय चेतना से जोड़ना है। 🔱 क्यों विशेष है 'पूजा सारथी' का यह अनुष्ठान? आज के व्यस्त समय में सही विधि-विधान और शुद्ध उच्चारण के साथ पूजा संपन्न कराना एक बड़ी चुनौती है। 'पूजा सारथी' इसी कमी को पूरा करता है। शास्त्रोक्त सम्पुट पाठ विधि - यजमान की विशेष मनोकामना (जैसे- रोग मुक्ति, धन लाभ, संतान प्राप्ति या गृह शांति) के अनुसार, मानस की विशेष चौपाइयों का 'सम्पुट' लगाकर पाठ किया जाता है, जिससे इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। लयबद्ध और संगीतमय प्रवाह - शास्त्रीय और पारंपरिक धुनों के साथ जब ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम की थाप पर राम-नाम गूंजता है, तो पूरा माहौल साक्षात अयोध्या धाम जैसा प्रतीत होने लगता है। 🌟 अखण्ड रामायण पाठ का पौराणिक एवं वैज्ञानिक महत्व "राम नाम कलि अभिमत दाता। हित परलोक लोक पितु माता॥" अर्थात् - कलियुग में राम का नाम ही समस्त इच्छाओं को पूरा करने वाला और लोक-परलोक में कल्याण करने वाला है। आप यह पाठ निम्नलिखित अवसरों पर आयोजित करवा सकते हैं। नए घर के गृह प्रवेश के समय 🏠 विवाह की वर्षगांठ या जन्मदिवस पर 🎉 नए व्यवसाय या फैक्ट्री की शुरुआत पर 🏢 पितरों की शांति और पूर्वजों के आशीर्वाद हेतु 🙏 🤝 'पूजा सारथी' - आपका आध्यात्मिक सारथी हमारा मानना है कि पूजा केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि ईश्वर से जुड़ने का माध्यम है। 'पूजा सारथी' आपके घर के इस मांगलिक प्रसंग की ए टू जेड (A to Z) जिम्मेदारी लेता है—पूजा सामग्री से लेकर ब्राह्मणों की व्यवस्था तक, ताकि आप बिना किसी तनाव के पूरी तरह भक्ति रस में डूब सकें।

22hr – 24hr
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भगवान हनुमान

Sunderkand Path संगीतमय सुंदरकांड पाठ

🌸 'पूजा सारथी' संगीतमय सुन्दरकाण्ड पाठ – संकट कटै मिटै सब पीरा 🌸 सुन्दरकाण्ड श्री रामचरितमानस का वो कल्पवृक्ष है जो मनुष्य की हर जायज मनोकामना को पूरा करता है। जब हमारे सुसंस्कृत और सुरीले पाठकों द्वारा हनुमान जी के पराक्रम और भक्ति की कथा भजनों के साथ गूंजती है, तो पूरा माहौल साक्षात सात्विक और दैवीय ऊर्जा से भर जाता है। ✨ इस संगीतमय पाठ की मुख्य विशेषताएं - भक्ति और संगीत का संगम - चौपाइयों के साथ-साथ बाबा हनुमान के मनमोहक और झूमने पर विवश कर देने वाले भजनों का समावेश। शुद्ध और सस्वर वाचन - संगीत के आनंद के साथ-साथ पाठ की शुद्धता, व्याकरण और वैदिक मर्यादा का 100% पालन। सामूहिक हनुमान चालीसा एवं संकटमोचन अष्टक: पाठ के प्रारंभ और मध्य में भक्तों में जोश भरने वाले विशेष पाठ। भव्य संगीतमय महाआरती - कपूर की दिव्य खुशबू और ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ हनुमान जी की महाआरती।

2hr – 4hr
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भगवान विष्णु

Vishnu Sahasranam Stotram Path

🌟 'पूजा सारथी' श्री विष्णु सहस्त्रनाम पाठ – वैकुंठ की सात्विक ऊर्जा और मानसिक शांति 🌟 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय! ॐ नमो नारायण! 🙏 संसार के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु के एक हजार पवित्र नामों का महापुंज है—'श्री विष्णु सहस्त्रनाम'। महाभारत के अनुशासन पर्व से उद्घृत यह दिव्य स्तोत्र जीवन के समस्त दुखों, मानसिक तनावों और बाधाओं को जड़ से मिटाने की अचूक शक्ति रखता है। 'पूजा सारथी' आपके घर और व्यावसायिक स्थल पर परम विद्वान वैदिक ब्राह्मणों द्वारा संपूर्ण विधि-विधान, शुद्ध उच्चारण और सस्वर वाचन के साथ इस पावन पाठ का दिव्य आयोजन लेकर आया है। जब शंख की ध्वनि, चंदन की महक और तुलसी दल के साथ श्री हरि के नामों का गान होता है, तो पूरा परिवेश साक्षात वैकुंठ धाम जैसा पवित्र हो जाता है। ✨ इस पाठ की मुख्य विशेषताएं: वैदिक आचार्यों द्वारा शुद्ध उच्चारण - स्तोत्र पाठ में अक्षरों की शुद्धता और 'न्यास विधि' का विशेष महत्व है, जिसे हमारे सुसंस्कृत ब्राह्मण पूर्ण मर्यादा के साथ संपन्न करते हैं। लक्ष्मी-नारायण पूजन - पाठ से पूर्व सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु का शोडशोपचार (16 विधियों से) विशेष पूजन। शंख ध्वनि एवं सात्विक वातावरण: नकारात्मकता को दूर करने के लिए विशेष शंखनाद और मंत्रोच्चार। विष्णु जी की दिव्य महाआरती: पाठ के समापन पर सुगंधित धूप, कपूर और गाय के घी के दीपकों के साथ नारायण जी की भव्य आरती। यदि आप भी एकादशी, पूर्णिमा, गुरुवार, गृह प्रवेश या किसी विशेष पारिवारिक मांगलिक अवसर पर अपने घर या कार्यालय में श्री विष्णु सहस्त्रनाम पाठ का आयोजन कराना चाहते हैं, तो 'पूजा सारथी' से आज ही यह पूजा बुक करें।

1hr – 2hr
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पितृ देवता

Pitra Tarpan Shradd Puja

'पूजा सारथी' ऐप के माध्यम से आपकी सेवा में - आपकी भावनाओं और शास्त्रों की मर्यादा को समझते हुए, 'पूजा सारथी' आपके घर या किसी पवित्र तीर्थ स्थल पर संपूर्ण शास्त्रोक्त विधि से श्राद्ध एवं तर्पण अनुष्ठान की सुविधा सीधे आपके मोबाइल तक लाया है। वेदमूर्ति और सुसंस्कृत विद्वान ब्राह्मण - मथुरा वृन्दावन,काशी, प्रयागराज और गया जैसे पावन तीर्थों की परंपरा से दीक्षित हमारे अनुभवी वैदिक पंडित आपके पूर्वजों के नाम, गोत्र और तिथि के अनुसार शुद्ध मंत्रोच्चार के साथ तर्पण, पिंड दान और पार्वण श्राद्ध संपन्न कराते हैं। पूर्ण सात्विकता और शुद्ध सामग्री - कुशा, काले तिल, जौ और गंगाजल के साथ शास्त्रों में वर्णित नियमों का शत-प्रतिशत पालन। ब्राह्मण भोज एवं दान प्रबंधन - तृप्ति का यह अनुष्ठान तब तक पूरा नहीं होता जब तक ब्राह्मण और बेजुबान जीवों (गाय, कौआ, कुत्ता) को ग्रास न दिया जाए। 'पूजा सारथी' इसकी भी उचित व्यवस्था सुनिश्चित करता है। आइए, इस पितृ पक्ष में अपनी जड़ों की ओर लौटें। अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए और अपने परिवार में सुख, समृद्धि व 'पितृ दोष' से मुक्ति के लिए पूरी श्रद्धा के साथ तर्पण और श्राद्ध पूजा का संकल्प लें। "ॐ आब्रह्मस्तम्बपर्यन्तं देवर्षिपितृमानवाः। तृप्यन्तु पितरः सर्वे मातृमातामहादयः॥" अपने पितरों के दिव्य आशीर्वाद के लिए आज ही 'पूजा सारथी' पर योग्य ब्राह्मण की सेवा बुक करें।

1hr – 1hr
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अग्नि देव एवं प्रकृति के सभी देवगणों की पूजा

Vivah Panigrahan Sanskar

🌺 विवाह (पाणिग्रहण) संस्कार - पवित्र वैदिक रस्मों के साथ जीवन की नई शुरुआत 🌺 विवाह हिंदू धर्म के सोलह संस्कारों में सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र संस्कार माना गया है। 'पाणिग्रहण' का अर्थ है जीवनसाथी का हाथ थामना और अग्नि देव को साक्षी मानकर एक-दूसरे का उम्र भर साथ निभाने का संकल्प लेना। यह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों, संस्कारों और आत्माओं का शाश्वत मिलन है। आज की व्यस्त दिनचर्या में विवाह की सभी वैदिक रस्मों को पूरी शुद्धता और शास्त्रोक्त विधि से संपन्न कराना एक बड़ी चुनौती हो सकती है। 'पूजा सारथी' ऐप आपकी इसी चिंता को दूर करता है, ताकि आप बिना किसी तनाव के अपने जीवन के सबसे खास दिन का आनंद ले सकें। 'पूजा सारथी' विवाह संस्कार के लिए आपकी पहली पसंद क्यों है? वैदिक और प्रमाणित विद्वान - हमारे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सभी पंडित जी उच्च शिक्षित, अनुभवी और वैदिक कर्मकांडों में पारंगत हैं। वे मंत्रोच्चार की शुद्धता और रस्मों के सही अर्थ के साथ विवाह संपन्न कराते हैं। आपकी परंपराओं का सम्मान - चाहे उत्तर भारतीय विवाह हो, दक्षिण भारतीय, बंगाली, या राजस्थानी—हम आपकी क्षेत्रीय मान्यताओं, कुल परंपराओं और भाषा के अनुसार पंडित जी की सुविधा प्रदान करते हैं। शुभ मुहूर्त और कुंडली मिलान - विवाह की तिथि तय करने से लेकर, कुंडली मिलान और लग्न के सटीक शुभ मुहूर्त की गणना के लिए हमारे ज्योतिषाचार्यों का मार्गदर्शन प्राप्त करें। संपूर्ण पूजा सामग्री की व्यवस्था: हल्दी, मेहंदी, मंडप से लेकर सप्तपदी तक—आपको पूजा सामग्री की लिस्ट बनाने या बाज़ार के चक्कर लगाने की ज़रूरत नहीं है। हमारी टीम संपूर्ण और शुद्ध सामग्री की व्यवस्था कर सकती है। पारदर्शिता और सुविधा - आसान बुकिंग प्रक्रिया, स्पष्ट मूल्य निर्धारण (कोई छिपी हुई लागत नहीं) और 24/7 ग्राहक सहायता। आज ही 'पूजा सारथी' ऐप के माध्यम से अपने विवाह संस्कार के लिए बुकिंग करें और वैदिक मंत्रों की गूंज व देवताओं के पूर्ण आशीर्वाद के साथ अपने नए जीवन की शुरुआत करें!

1hr – 3hr
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भगवान विश्वकर्मा

Vishwakarma Puja

🛠️ भगवान विश्वकर्मा पूजा - आपके व्यवसाय, प्रगति और हुनर को ईश्वर का आशीर्वाद सनातन परंपरा में भगवान विश्वकर्मा पूजा सृजन, कला, शिल्प और आधुनिक विज्ञान के संगम का महापर्व है। भगवान विश्वकर्मा इस ब्रह्मांड के रचयिता और देवताओं के प्रधान वास्तुकार (Architect) हैं। यह विशेष दिन हमारे दैनिक जीवन और व्यवसाय में उपयोग होने वाले औजारों, वाहनों, कंप्यूटरों, मशीनों और कारखानों के प्रति सम्मान व कृतज्ञता प्रकट करने का है। चाहे आप एक बड़े उद्योगपति हों, इंजीनियर हों, आर्किटेक्ट हों, आईटी प्रोफेशनल हों या कोई स्वतंत्र हुनरमंद (Technician)—इस दिन अपने कार्यस्थल पर पूजा करने से व्यवसाय में कभी मंदी नहीं आती और दिन-दूनी रात-चौगुनी तरक्की होती है। 'पूजा सारथी' ऐप के माध्यम से आप अपने ऑफिस, दुकान, फैक्ट्री या घर पर इस दिव्य पूजा को पूरी निष्ठा और वैदिक विधि-विधान के साथ आयोजित कर सकते हैं। ✨ इस पूजा का धार्मिक और व्यावसायिक महत्व - कर्म ही पूजा (Work is Worship) - इस दिन सभी मशीनों, लैपटॉप, औजारों और वाहनों की साफ-सफाई कर उनकी पूजा की जाती है। माना जाता है कि ऐसा करने से पूरे वर्ष मशीनें और उपकरण बिना किसी बड़ी खराबी (Breakdown) के सुचारू रूप से काम करते हैं। व्यापार में उन्नति और सुरक्षा - फैक्ट्रियों और दुकानों में श्री विश्वकर्मा जी का आह्वान करने से कार्यस्थल पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, दुर्घटनाओं से रक्षा होती है और धन-धान्य की वृद्धि होती है। कौशल और रचनात्मकता में विकास - भगवान विश्वकर्मा की कृपा से व्यक्ति के भीतर नई सोच, रचनात्मकता (Creativity) और तकनीकी कौशल का विकास होता है, जो करियर में ऊंचाइयों पर ले जाता है। 📋 मुख्य अनुष्ठान और रस्में (Rituals Involved): कार्यस्थल व मशीनों का शुद्धिकरण, भगवान गणेश और विश्वकर्मा जी की मूर्ति/चित्र की स्थापना, कलश पूजन, शस्त्र व औजार पूजन (मशीन पूजा), हवन (यज्ञ) आहुति, आरती और श्रमजीवियों/कर्मचारियों को मिठाई व उपहार वितरण। 🌟 पूजा सारथी ऐप ही क्यों चुनें? व्यावसायिक स्थलों के अनुकूल आचार्य - हमारे पंडित जी फैक्ट्रियों, कॉर्पोरेट ऑफिसों और दुकानों में बड़ी ही शालीनता और आपके काम के समय (Shift) के अनुसार पूजा संपन्न कराने में माहिर हैं। समय प्रबंधन (Time Management) - बिजनेस के व्यस्त शेड्यूल को ध्यान में रखते हुए, हमारे आचार्य सही मुहूर्त पर और पूरी विधि के साथ तय समय सीमा के भीतर पूजा पूरी करते हैं। औद्योगिक समृद्धि का संकल्प - हमारे पंडित जी विशेष रूप से आपके व्यापार की वृद्धि, कर्मचारियों की सुरक्षा और नए प्रोजेक्ट्स की सफलता के लिए वैदिक मंत्रों से विशेष संकल्प कराते हैं। अपने हुनर को सम्मान दें और अपने कार्यक्षेत्र को सफलता के शिखर पर ले जाएं। आज ही अपनी फैक्ट्री, ऑफिस या दुकान में 'विश्वकर्मा पूजा' के लिए हमारे विशेषज्ञ आचार्यों को बुक करें!

2hr – 3hr
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Shiv parwati

Engagement Puja

एंगेजमेंट (वाग्दान संस्कार) पूजा - अटूट प्रेम और मांगलिक जीवन का शुभारंभ वचनों की पवित्रता, देवताओं का आशीष! हिंदू सनातन परंपरा में सगाई को केवल एक सामाजिक उत्सव नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण वैदिक स्तंभ माना गया है, जिसे 'वाग्दान संस्कार' कहा जाता है। 'वाग्दान' का अर्थ है—वाणी का दान यानी दो परिवारों द्वारा देवताओं, अग्नि और समाज को साक्षी मानकर वर-वधू के विवाह का अटूट संकल्प लेना। पूजा सारथी की विशेष एंगेजमेंट पूजा सर्विस इस पावन बेला को आध्यात्मिक शुद्धता और दिव्य मंत्रों की गूंज से सराबोर कर देती है, जिससे नए जोड़े के आने वाले वैवाहिक जीवन की नींव बेहद मजबूत और दोषरहित बनती है। क्यों अनिवार्य है एंगेजमेंट पर वैदिक पूजन? विवाह जीवन का सबसे बड़ा मोड़ है, और इसकी शुरुआत यदि ईश्वरीय आशीर्वाद से हो, तो जीवन में कभी सामंजस्य की कमी नहीं होती। यह पूजा सुनिश्चित करती है कि विघ्नों का नाश हो - सगाई से लेकर विवाह संपन्न होने तक के सफर में कोई भी ग्रह दोष या अदृश्य बाधा आड़े न आए। कुंडली के दोष शांत हों - यदि वर-वधू की कुंडली में कोई छोटा-मोटा ग्रह दोष या मेलापक (गुण मिलान) संबंधी तनाव हो, तो वह इस पूजा के प्रभाव से शांत हो जाता है। रिश्ते में मधुरता आए - मंत्रों की सकारात्मक ऊर्जा से होने वाले वर-वधू के मिलन में आपसी विश्वास, प्रेम और सम्मान जीवनभर बना रहता है। पूजा सारथी ऐप की प्रीमियम विशेषताएं (Why Book with Us?): समय और मुहूर्त की शुद्धता - हमारे ज्योतिषाचार्य आपकी कुंडलियों के अनुसार सगाई और रिंग सेरेमनी का सबसे सटीक और श्रेष्ठ शुभ मुहूर्त निकालते हैं। वीआईपी और कॉर्पोरेट सेटअप के अनुकूल - चाहे घर का आंगन हो या किसी बड़े होटल का बैंक्वेट हॉल, हमारे पंडित जी समय पर पहुंचकर पूरी मर्यादा और शालीनता के साथ पूजा संपन्न कराते हैं। चिंता मुक्त कस्टमाइज्ड पैकेज - पूजा की हर छोटी-बड़ी और शुद्ध सामग्री (रोली, कलावा, पीला कपड़ा, अक्षत आदि) पंडित जी अपने साथ लेकर आते हैं, ताकि आप बिना किसी भाग-दौड़ के उत्सव का आनंद ले सकें। [ आज ही अपना शुभ मुहूर्त चुनें और अपनी एंगेजमेंट पूजा बुक करें ]

0hr 30min – 1hr
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Ganesh lakshmi

Roka (Tilak ceremony)

विवाह संस्कार की यात्रा का पहला और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव होता है 'रोका और तिलक'। यह वह पवित्र रस्म है जहाँ दोनों परिवार मिलकर रिश्ते की आधिकारिक घोषणा करते हैं। वर के माठे पर लगने वाला 'तिलक' केवल एक संस्कार नहीं, बल्कि वधू पक्ष की ओर से वर को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान, आदर और स्वीकार्यता का प्रतीक है। इस विशेष उत्सव को पूर्ण रूप से मांगलिक और दोषमुक्त बनाने के लिए 'पूजा सारथी' ऐप आपके साथ है, ताकि दो परिवारों का यह प्रथम मिलन ईश्वर के दिव्य आशीर्वाद के साथ शुरू हो। ✨ इस पूजा का महत्व और विशेषताएं: प्रथम पूज्य का आह्वान - पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से होती है, ताकि होने वाले वर-वधु के इस नए रिश्ते में कभी कोई विघ्न या बाधा न आए। वर का राजसी सत्कार (तिलक) - शास्त्रों के अनुसार, वर को भगवान विष्णु का स्वरूप मानकर उसका तिलक, अक्षत और फूलों से पूजन किया जाता है, जो उनके आने वाले जीवन में समृद्धि लाता है। वंश और कुल की मर्यादा- इस रस्म में दोनों परिवारों के माता-पिता और बड़े-बुजुर्ग आपस में गले मिलकर शगुन (नेग) और उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं, जिससे आपसी सौहार्द और मर्यादा मजबूत होती है। 🌟 पूजा सारथी ऐप ही क्यों चुनें? मर्यादित और सुचारू आयोजन - रोका और तिलक के समय दोनों पक्षों के मुख्य अतिथि मौजूद होते हैं। हमारे पंडित जी पूरी शालीनता और स्पष्ट मंत्रोच्चार के साथ समय पर पूजा संपन्न कराते हैं। परंपरागत ज्ञान - हर समाज और क्षेत्र में तिलक की रीतियाँ थोड़ी अलग होती हैं। हमारे आचार्य आपकी पारिवारिक परंपराओं को ध्यान में रखकर ही विधि पूरी कराते हैं। तनावमुक्त शुरुआत - जब दो परिवार पहली बार इतने बड़े स्तर पर मिलते हैं, तो व्यवस्थाओं की चिंता स्वाभाविक है। पूजा की पूरी जिम्मेदारी आप हमें सौंपकर अतिथियों का स्वागत कर सकते हैं। दो कुलों के इस मिलन उत्सव को वैदिक मंत्रों की गूंज और अपनों के स्नेह से और भी गरिमापूर्ण बनाएं। आज ही 'रोका-तिलक सेरेमनी' के लिए श्रेष्ठ पंडित जी बुक करें!

0hr 30min – 1hr
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Satguru

Yagyopavit Sanskar यज्ञोपवीत संस्कार

यज्ञोपवीत संस्कार - सनातन संस्कृति का महान बौद्धिक और आध्यात्मिक पर्व सनातन धर्म में वर्णित 16 संस्कारों में 'यज्ञोपवीत संस्कार' (जिसे उपनयन या जनेऊ संस्कार भी कहा जाता है) बालक के जीवन का टर्निंग पॉइंट माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस संस्कार के बाद ही बालक को 'द्विज' (जिसका दूसरा जन्म हुआ हो) की उपाधि मिलती है। यहाँ से बालक खेल-कूद की दुनिया से निकलकर शिक्षा, सदाचार, अनुशासन और गुरु-दीक्षा के मार्ग पर आगे बढ़ता है। 'पूजा सारथी' ऐप के माध्यम से आप अपने बालक के इस अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र संस्कार को पूर्ण वैदिक शुद्धता और शास्त्रीय नियमों के साथ संपन्न कर सकते हैं। ✨ इस संस्कार का धार्मिक और व्यावहारिक महत्व - ज्ञान और बुद्धि का विकास - इस संस्कार के दौरान बालक को 'गायत्री मंत्र' की दीक्षा दी जाती है, जो उसकी एकाग्रता, स्मरण शक्ति और बौद्धिक क्षमता को प्रखर बनाती है। तीन धागों का दिव्य संकल्प - जनेऊ के तीन धागे देवऋण, पितृऋण और ऋषिऋण के प्रतीक हैं, जो बालक को समाज, परिवार और ईश्वर के प्रति उसके कर्तव्यों की याद दिलाते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण - जनेऊ को कान पर बांधने और शरीर पर धारण करने से एक्यूप्रेशर के नियमों के अनुसार मानसिक सतर्कता बढ़ती है, रक्तचाप (Blood Pressure) नियंत्रित रहता है और पाचन क्रिया सुधरती है। 📋 मुख्य अनुष्ठान और रस्में (Rituals Involved) चौल कर्म (मुंडन), पवित्र गंगाजल स्नान, यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण, गुरु-दीक्षा (गायत्री मंत्र), भिक्षाटन रस्म (जिसमें बालक पहली बार ब्रह्मचारी के रूप में भिक्षा मांगता है) और काशी यात्रा की पारंपरिक रस्म। नोट - अगर यह संस्कार बाल्यावस्था में नहीं हुआ तो विवाह के पूर्व होता है उसमें मुंडन जैसी रस्म नहीं होती या अंश मात्र होती है 🌟 पूजा सारथी ऐप ही क्यों चुनें? ऋषि परंपरा के ज्ञाता आचार्य - हमारे ऐप से जुड़े पंडित जी उपनयन संस्कार की बारीकियों, सूत्रों के वेधन और गुरु-दीक्षा की प्राचीन विधियों में पूरी तरह पारंगत हैं। पारिवारिक रीतियों का समन्वय - जनेऊ संस्कार में हर क्षेत्र और कुल (वंश) की अपनी कुछ विशेष परंपराएं होती हैं। हमारे आचार्य आपकी कुल-रीति के अनुसार ही पूजन कराते हैं। संपूर्ण मार्गदर्शन - पूजा की तिथि (मुहूर्त निकालने) से लेकर, आवश्यक सामग्री की सूची और यज्ञ की तैयारी तक, हमारी टीम आपकी हर कदम पर सहायता करती है। अपने बालक को श्रेष्ठ संस्कार, उत्तम स्वास्थ्य और उच्च बुद्धि का वरदान दें। आज ही 'यज्ञोपवीत संस्कार' के आयोजन के लिए हमारे विशेषज्ञ आचार्यों को बुक करें!

1hr – 3hr
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puja
गणेश गौरी आदि

Ring Ceremony (Sagai) Puja

दो दिलों के मिलन और एक नए सफर की शुरुआत का खूबसूरत आगाज़ है 'रिंग सेरेमनी' (सगाई)। यह सिर्फ दो अंगूठियों का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि दो परिवारों के आपसी विश्वास, स्नेह और अटूट बंधन की मधुर शुरुआत है। इस मांगलिक अवसर पर देवी-देवताओं के आशीर्वाद से वर-वधु के आने वाले जीवन में सुख, समृद्धि और अटूट प्रेम बना रहे, इसी कामना के साथ पूरे विधि-विधान से यह पूजन संपन्न किया जाता है। आइए, इस पावन बेला पर सगाई की वैदिक पूजा के साथ नए दंपत्ति के सुनहरे भविष्य की मंगल कामना करें। विघ्नहर्ता का आशीर्वाद - पूजा की शुरुआत गणेश वंदना से होती है, ताकि विवाह के इस सफर में आने वाली सभी बाधाएं दूर हों। ग्रह शांति और समृद्धि - नवग्रह पूजन के जरिए होने वाले वर-वधु के आने वाले जीवन में सुख, शांति और सामंजस्य की कामना की जाती है। रिश्तों में मधुरता - मंत्रोच्चार और संकल्प के साथ जब अंगूठियों का आदान-प्रदान होता है, तो वह रिश्ता जीवनभर के लिए पवित्र और मजबूत बन जाता है। 🌟 पूजा सारथी ऐप ही क्यों चुनें? अनुभवी पंडित जी - हमारी ऐप के माध्यम से आप सीधे विद्वान और अनुभवी आचार्यों को इस विशेष पूजा के लिए बुक कर सकते हैं। शुद्ध वैदिक विधि - संपूर्ण पूजन प्रक्रिया शास्त्रों में वर्णित विधि-विधान के अनुसार संपन्न कराई जाएगी। चिंतामुक्त आयोजन - सामग्री की लिस्ट से लेकर शुभ मुहूर्त तक, हर छोटी-बड़ी जिम्मेदारी अब हमारी है।

0hr 30min – 1hr
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puja
Ganesh गौरी

Sehra Bandi (सेहरा बंदी) पूजा

विवाह के दिन जब बेटा दूल्हे के लिबास में तैयार होता है, तो उसका रूप किसी राजा से कम नहीं लगता। इस राजसी स्वरूप को पूर्णता मिलती है 'सेहरा बंदी' की रस्म से। शास्त्रों के अनुसार, दूल्हे के सिर पर सेहरा (मुकुट) सजाने से पहले ईश्वर का आशीर्वाद लेना अनिवार्य माना गया है, ताकि दूल्हा हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नज़र से सुरक्षित रहे। 'पूजा सारथी' ऐप के माध्यम से आप इस बेहद भावुक, उल्लासपूर्ण और पारंपरिक रस्म को संपूर्ण वैदिक विधि-विधान से संपन्न कर सकते हैं। इस पूजा का महत्व और विशेषताएं: कुलदेवता और गणेश पूजन - सेहरा सजाने से पहले विघ्नहर्ता गणेश जी और परिवार के कुलदेवता की पूजा की जाती है, ताकि बारात की रवानगी से लेकर विवाह संपन्न होने तक सब कुछ निर्विघ्न रहे। नज़र दोष से रक्षा - इस पूजा और मंत्रोच्चार से दूल्हे के चारों ओर एक सकारात्मक सुरक्षा कवच बनता है, जो उसे हर तरह की बुरी नज़र (नज़र दोष) से बचाता है। पारिवारिक स्नेह का उत्सव - यह रस्म पूरे परिवार—विशेषकर माँ, बहनों, भाभी और जीजाजी के आपसी प्रेम और भूमिका को दर्शाती है। वैदिक मंत्रों के साथ यह पल हमेशा के लिए यादगार बन जाता है। 🌟 पूजा सारथी ऐप ही क्यों चुनें? परंपरा का सम्मान - हमारी ऐप के अनुभवी पंडित जी आपकी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराओं (Customs) के अनुसार ही पूजा संपन्न कराते हैं। समय का पूरा ध्यान - विवाह के दिन समय का बहुत महत्व होता है। हमारे आचार्य तय शुभ मुहूर्त पर पहुंचकर सुचारू रूप से पूजन करवाते हैं। चिंतामुक्त परिवार - घर के सबसे व्यस्त दिन पर पूजा की तैयारी की चिंता आप हम पर छोड़ सकते हैं। बेटे के जीवन के इस सबसे बड़े और खूबसूरत दिन की शुरुआत दिव्य मंत्रों और बड़ों के आशीर्वाद के साथ करें। आज ही 'सेहरा बंदी पूजा' के लिए श्रेष्ठ पंडित जी बुक करें!

0hr – 0hr 30min
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लड्डू गोपाल जी /लक्ष्मी नारायण

Garbhadhan Sanskar Puja

गर्भाधान संस्कार क्या है? (What is Garbhadhan Sanskar?) यह सनातन धर्म का सबसे पहला संस्कार है। शास्त्रों में कहा गया है कि जिस प्रकार एक सुंदर और मजबूत इमारत के लिए उसकी नींव का मजबूत होना जरूरी है, ठीक उसी तरह एक गुणी और तेजस्वी संतान के लिए 'गर्भाधान' का शुद्ध और संस्कारी होना अनिवार्य है। यह संस्कार पति-पत्नी के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को शुद्ध करके एक उच्च कोटि की आत्मा को आकर्षित करने का विज्ञान है। इस संस्कार का मुख्य उद्देश्य (Core Objective) मन और शरीर की शुद्धि - गर्भधारण से पूर्व माता-पिता के विचारों और शरीर को मंत्रों और यज्ञ द्वारा पवित्र करना। दिव्य आत्मा का आह्वान - कामवासना से ऊपर उठकर सृष्टि के निर्माण और वंश वृद्धि के लिए ईश्वर से प्रार्थना करना। जीन और संस्कारों का प्रभाव - आयुर्वेद और आधुनिक जेनेटिक्स भी मानते हैं कि कंसेप्शन (Conception) के समय माता-पिता की जैसी मानसिक स्थिति होती है, बच्चे का स्वभाव और डीएनए (DNA) वैसा ही बनता है। पूजा सारथी ऐप पर क्या मिलेगा? वैदिक परामर्श (Consultation) हमारे आचार्य शास्त्रों और ज्योतिषीय गणना के अनुसार गर्भधारण के लिए सबसे शुभ और सकारात्मक दिनों (मुहूर्त) की जानकारी देते हैं। पूर्व-पुजन विधि (Pre-Conception Puja) गर्भधारण से पहले घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिए की जाने वाली विशेष शुद्धि पूजा की स्टेप-बाय-स्टेप गाइड। आयुर्वेदिक और सात्विक दिनचर्या - इस पावन समय में पति-पत्नी के लिए कैसा आहार, विचार और वातावरण होना चाहिए, इसका पूरा वैदिक मार्गदर्शन।

1hr – 3hr
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भगवान नारायण

Punsavan Sanskar Puja

पुंसवन संस्कार क्यों आवश्यक है? (Importance & Benefits) दिव्य ऊर्जा का संचार - वैदिक मंत्रों की तरंगों से गर्भ के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बनता है, जो शिशु की हर नकारात्मकता से रक्षा करता है। उत्तम स्वास्थ्य और बुद्धिमत्ता - शास्त्रों के अनुसार, इस समय दी जाने वाली विशेष औषधियां (जैसे बरगद के अंकुर का रस) और मंत्र माँ और बच्चे दोनों की इम्युनिटी और ब्रेन सेल्स को मजबूत करते हैं। संस्कारों की शुरुआत - यह माता-पिता को उनके आने वाले दायित्वों का अहसास कराता है और गर्भ में ही बच्चे के भीतर अच्छे गुणों के बीज बोता है। प्रमाणित वैदिक ब्राह्मण: हमारे आचार्यों को गर्भाधान और गर्भ संस्कारों का गहरा ज्ञान और अनुभव है। शुद्ध और दुर्लभ सामग्री - इस पूजा में उपयोग होने वाली विशेष औषधियां (जैसे वट-अंकुर) और प्रामाणिक पूजन किट ब्राह्मण स्वयं साथ लाएंगे। पारिवारिक मार्गदर्शन - पूजा के साथ-साथ आचार्य जी होने वाले माता-पिता को गर्भावस्था के दौरान रखे जाने वाले नियमों और आहार-विहार की पूरी जानकारी देंगे।

1hr – 3hr
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puja
लक्ष्मी नारायण/सूर्यादि नवग्रह देव

Simantonnayan Sanskar Puja

उद्देश्य - गर्भपात रोकना, माता व शिशु की रक्षा करना, और शिशु के अच्छे गुण, स्वभाव और बुद्धि का विकास करना. कब करें - गर्भावस्था के चौथे, छठे या आठवें महीने में, आठवा महीना सबसे उत्तम माना जाता है. संस्कार की विधि और मंत्र (संक्षेप में) पूजा - भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है, जिससे प्रसव के भय दूर हों. मांग भरना - पति गूलर (गूलर) की टहनी या कुशा से पत्नी की मांग तीन बार निकालता है मंत्रोच्चार - अदिति और प्रजापति से प्रेरित है,. नवग्रह मंत्र - पति-पत्नी मिलकर नवग्रह मंत्रों का जाप करते हैं जिससे शिशु को ग्रहों का अनुकूल प्रभाव मिले. ध्वनि का प्रभाव - वीणा जैसे मधुर संगीत का श्रवण कराया जाता है, जिससे शिशु पराक्रमी बने. ब्राह्मण द्वारा संस्कार कराएं हमसे जुड़ें

1hr – 2hr
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puja
सूर्यदेव एवं चन्द्रदेव

Nishkraman Sanskar Puja

मुख्य उद्देश्य बाहरी दुनिया से परिचय - शिशु को पहली बार समाज और बाहरी वातावरण से जोड़ना। ईश्वरीय आशीर्वाद - सूर्य, चंद्रमा और अन्य देवताओं से शिशु के स्वस्थ, तेजस्वी और यशस्वी जीवन के लिए प्रार्थना करना। तेजस्वी और विनम्र बनाना - सूर्य के तेज और चंद्र की शीतलता से बच्चे को तेजस्वी और विनम्र बनाना विधि और परंपरा समय: जन्म के चौथे महीने में, जब शिशु का शरीर बाहरी वातावरण के अनुकूल हो जाता है। स्थान: घर के आँगन या मंदिर में किया जाता है, जहाँ सूर्य का प्रकाश आता हो । प्रक्रिया - सूर्य और चंद्र देव की पूजा की जाती है। शिशु को सूर्य की किरणें और चंद्रमा की रोशनी दिखाई जाती है। शंखनाद और वैदिक मंत्रों का जाप किया जाता है। माता-पिता और परिवार के सदस्य शिशु की सलामती के लिए प्रार्थना करते हैं। संक्षेप में, निष्क्रमण संस्कार शिशु के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो उसे घर के सुरक्षित दायरे से निकालकर प्रकृति और समाज से जोड़ता है, साथ ही उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थनाओ का प्रतीक है

1hr – 3hr
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Ganesh ji

Vehicle Vaahan Puja

नई गाड़ी की पूजा (वाहन पूजन एवं शुद्धि संस्कार) हमारे सनातन धर्म में किसी भी नई संपत्ति, जैसे भूमि, भवन या वाहन (गाड़ी) को घर लाने पर उसका पूजन करना एक अनिवार्य और शुभ परंपरा है। नई गाड़ी की पूजा केवल एक रस्म नहीं है, बल्कि यह वाहन को भगवान के चरणों में समर्पित करके उनकी सुरक्षा और कृपा प्राप्त करने का माध्यम है। इस पूजा के अंतर्गत मुख्य रूप से विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश, संकटमोचन हनुमान जी और विश्वकर्मा देव की आराधना की जाती है। गाड़ी पर पवित्र स्वास्तिक बनाना, मंत्रोच्चार के साथ कलश के जल से शुद्धि करना, नारियल फोड़ना और टायरों के नीचे नींबू रखना—ये सभी क्रियाएं वाहन को सकारात्मक ऊर्जा से भर देती हैं ताकि आपका हर सफर मंगलमयी हो। सनातन परंपरा में जड़ और चेतन दोनों में ईश्वर का वास माना गया है। नई गाड़ी की पूजा करके हम उस यंत्र (Vehicle) को भगवान के चरणों में सौंपते हैं और प्रार्थना करते हैं कि "हे प्रभु! इस वाहन में बैठकर हम जहाँ भी जाएँ, सकुशल और आनंद के साथ वापस लौटें।" यह पूजा गाड़ी की यांत्रिक ऊर्जा को आध्यात्मिक सकारात्मकता में बदल देती है। "आपकी नई गाड़ी का हर सफर खुशहाल हो, रास्ते सुरक्षित हों और मंजिलें कामयाब हों! पूजा सारथी ऐप के साथ अपनी नई गाड़ी की पूजा आज ही बुक करें और निश्चिंत होकर खुशियों के नए सफर पर निकलें।" 🚗🌟🙏

1hr – 2hr
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लक्ष्मी गणेश जी

Haldi Ceremony

सनातन हिंदू विवाह पद्धति में 'हल्दी की रस्म' या 'हरिद्रा लेपन' विवाह संस्कार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अनिवार्य अंग है। यह रस्म आमतौर पर विवाह के दिन सुबह या विवाह से ठीक एक दिन पहले बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। इस मांगलिक रस्म में विद्वान पंडित जी द्वारा सबसे पहले हल्दी (हरिद्रा) देव का पूजन कराया जाता है। इसके बाद कूटकर तैयार की गई सगुन की हल्दी और सुगंधित औषधियों से बने उबटन को मंत्रोच्चार के बीच वर-वधू के माथे, कंधों, हाथों और पैरों पर लगाया जाता है। घर की सुहागिन महिलाएं और परिवार के सदस्य मंगल गीत गाते हुए इस रस्म को पूरा करते हैं, जो नए जीवन की शुरुआत के लिए बेहद शुभ माना जाता है। हल्दी रस्म भारतीय विवाहों में एक आनंदमय विवाह पूर्व समारोह है, जिसमें दूल्हा और दुल्हन के चेहरे, गर्दन, हाथो और पैरों पर हल्दी का पेस्ट (तेल/पानी/गुलाब जल के साथ मिलाकर) लगाया जाता है। घर पर आयोजित होने वाली यह रस्म शुद्धिकरण, शुभता और सौंदर्य का प्रतीक है, जबकि पीला रंग समृद्धि का प्रतीक है और बुरी आत्माओं को दूर भगाता है। शादी की व्यस्तताओं के बीच आपकी खुशियों और परंपराओं को सहेजने के लिए पूजा सारथी के पंडित जी पूरी विधि-विधान से इस रस्म को पूरा कराते हैं। हल्दी की रस्म के लिए शुभ मुहूर्त और पंडित जी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कृपया विवाह की तिथि से कुछ दिन पहले ही अपना स्लॉट बुक करें।

1hr – 2hr
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पितृ देव एवं तीर्थ

Vivah Mandap (मढ़ा) puja

विवाह संस्कार का सबसे मुख्य केंद्र होता है 'मंडप'। शास्त्रों के अनुसार, विवाह मंडप का निर्माण और उसकी पूजा (मढ़ा पूजन) शादी के उत्सव की आधिकारिक शुरुआत मानी जाती है। बांस या लकड़ी के खंभों से तैयार इस मंडप को बेहद पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसी के नीचे अग्नि को साक्षी मानकर वर-वधू सात फेरे लेते हैं। मढ़ा पूजा के दिन घर के आँगन में मंडप गाड़ा जाता है और हरिश (हल का मुख्य भाग), मूसल तथा मांगलिक कलाकृतियों के साथ वैदिक रीति से इसका पूजन होता है। इस रस्म में परिवार की महिलाएं मंगल गीत गाती हैं, जिससे पूरा घर खुशियों और सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर हो जाता है। विवाह मंडप पूजा (मंडप स्थापना) हिंदू विवाह का एक अत्यंत पवित्र अनुष्ठान है, जो वर-वधु के आने से पहले मुख्य विवाह स्थल को पवित्र करने के लिए किया जाता है। यह मंडप 4 खंभों (माता-पिता के प्रतीक) से बना होता है, जिसमे गणेश पूजा, कलश स्थापना, और अग्नि स्थापना की जाती है, जो विवाह को सिद्ध करने के लिए देवताओं को साक्षी मानते हैं। मंडप पूजा आमतौर पर विवाह के दिन सुबह या विवाह से एक-दो दिन पहले (तिथियों के अनुसार) की जाती है। शुभ मुहूर्त और पंडित जी की बुकिंग के लिए अभी स्लॉट चुनें।

1hr – 2hr
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puja
पितृ देव

Barsi Pitra Puja

बरसी पूजा (वार्षिक श्राद्ध) – अपनों के प्रति अटूट श्रद्धा और कृतज्ञता हमारे सनातन धर्म में माता-पिता और पूर्वज केवल एक नाम नहीं, बल्कि हमारे जीवन की वो नींव हैं जिनकी बदौलत आज हमारा अस्तित्व है। भले ही वे भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका सूक्ष्म आशीर्वाद हमेशा हमारे परिवार की ढाल बनकर रहता है। उनके देवलोक गमन के एक वर्ष पूरे होने पर, उनकी पुण्यतिथि (तिथि के अनुसार) पर की जाने वाली वार्षिक पूजा को 'बरसी पूजा' कहा जाता है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि अपने दिवंगत प्रियजनों के प्रति हमारे प्रेम, आदर और कृतज्ञता को प्रकट करने का सबसे पवित्र माध्यम है। यह समय है उन्हें यह बताने का कि वे आज भी हमारे दिलों में जीवित हैं। बरसी पूजा (बरसी श्राद्ध) एक महत्वपूर्ण हिंदू अनुष्ठान है जो परिवार के दिवंगत सदस्य की पहली पुण्यतिथि पर उनकी स्मृति का सम्मान करने, आत्मा की शांति सुनिश्चित करने और पूर्वजों को आदर देने के लिए किया जाता है। आमतौर पर, यह मृत्यु की तिथि (चंद्रमा के दिन) को ही आयोजित किया जाता है, जो अक्सर 11 महीने बाद मनाया जाता है, जिसमें वैदिक अनुष्ठान, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन शामिल होते हैं। इस पूजा का भावनात्मक एवं आध्यात्मिक महत्व (Importance) आत्मा की परम तृप्ति - मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जब संतान पूरी श्रद्धा से तर्पण और पिंडदान करती है, तो पितरों की आत्मा को परम शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। पितरों का अमूल्य आशीर्वाद - जब हमारे पूर्वज तृप्त होते हैं, तो वे अपनी संतान को सुख, सौभाग्य, दीर्घायु और अटूट समृद्धि का आशीर्वाद देकर जाते हैं। कर्तव्य और शांति का अहसास - माता-पिता के ऋण (पितृ ऋण) से मुक्त होने का प्रयास हर संतान का परम कर्तव्य है। इस पूजा को करने से मन को एक असीम आत्मिक शांति मिलती है कि हमने अपने अपनों के लिए उनका हक और सम्मान पूरा किया। इस भावुक और महत्वपूर्ण दिन पर, पूजा सारथी ऐप आपके साथ एक परिवार की तरह खड़ा है। हम सुनिश्चित करते हैं कि आपके अपनों की आत्मशांति के लिए की जाने वाली यह पूजा पूरी शुद्धता और वैदिक मर्यादा के साथ संपन्न हो।

1hr – 2hr
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