
🥣 अन्नप्राशन संस्कार - ममता के दूध से आत्मनिर्भरता का पहला घूंट "अब तक जो नन्हा सा जीवन केवल मां के आंचल की छांव और दूध के अमृत पर पलता था, वह अब इस धरा के अन्न का स्वाद चखने ज...
Duration
1hr – 3hr
अन्नप्राशन संस्कार का अर्थ और महत्व पहला ठोस आहार: यह बच्चे के जीवन का वह महत्वपूर्ण पल होता है जब वह पहली बार माँ के दूध के अलावा अन्य भोजन ग्रहण करता है। स्वास्थ्य और दीर्घायु - यह शिशु के अच्छे स्वास्थ्य, बुद्धि और लंबी उम्र के लिए किया जाने वाला एक अनुष्ठान है, जिसके द्वारा यह कामना की जाती है कि वह शुद्ध अन्न खाकर शुद्ध मन का हो । आहारशुद्धि - "आहारशुद्धौ सत्त्वशुद्धिः" के सिद्धांत के अनुसार, शुद्ध आहार से शरीर और मन मे सात्विक गुण बढ़ते हैं, और यह संस्कार इसी उद्देश्य से किया जाता है। धार्मिक परंपरा - यह 16 संस्कारों में से एक है और इसे शुभ मुहूर्त में, यज्ञ और देवताओं के पूजन के साथ संपन्न किया जाता है। समय सामान्यत - शिशु के 6 महीने पूरे होने पर, जब उसके दांत निकलने लगते हैं, तब यह संस्कार किया जाता है। प्रसाद: मुख्य रूप से चावल की खीर (दूध, चीनी / शहद, घी मिलाकर) या दलिया खिलाया जाता है। पवित्र सामग्री - शहद, घी, तुलसी दल और गंगाजल का प्रयोग भी होता है। प्रतीकात्मक वस्तुएँ - चांदी की कटोरी और चम्मच से भोजन कराया जाता है, जो स्वच्छता और समृद्धि का प्रतीक है और हाथो से भोजन कराने के बजाय संक्रमण से बचाता है। 🥣 अन्नप्राशन संस्कार पूजा: शिशु के पोषण और आरोग्य का उत्सव "अन्नाद्भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसंभवः..." (अर्थात्: संसार के सभी जीव अन्न से ही उत्पन्न होते हैं और अन्न से ही जीवित रहते हैं।) शिशु के जीवन के शुरुआती ६ महीने पूरी तरह माँ के दूध पर निर्भर होते हैं। लेकिन जैसे ही बच्चा ७वें महीने में प्रवेश करता है, उसके शरीर और मस्तिष्क को अधिक पोषण की आवश्यकता होती है। सनातन संस्कृति के १६ संस्कारों में 'अन्नप्राशन संस्कार' (जिसे आम भाषा में खीर चटाई या मुहूर्त भी कहते हैं) सातवां अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार है। यह संस्कार केवल बच्चे को पहली बार ठोस आहार खिलाने की रस्म नहीं है, बल्कि बच्चे के शारीरिक विकास, उत्तम स्वास्थ्य और शुद्ध चेतना की वैदिक शुरुआत है। 'पूजा सारथी' ऐप के माध्यम से हम इस बात को सुनिश्चित करते हैं कि आपके बच्चे का यह पहला निवाला दैवीय शक्तियों के आशीर्वाद और संपूर्ण पवित्रता के साथ उसके मुख में जाए। 🌟 अन्नप्राशन संस्कार का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व: पाचन तंत्र की शुद्धि (Scientific Aspect): विज्ञान भी मानता है कि ६ महीने के बाद शिशु का पेट ठोस आहार पचाने के लिए तैयार हो जाता है। इस पूजा में देवताओं को अर्पित की गई औषधियुक्त शुद्ध खीर चटाने से बच्चे का पाचन तंत्र (Digestive System) मजबूत होता है। अन्न दोष की मुक्ति (Spiritual Aspect): शास्त्रों के अनुसार, अन्न में एक ऊर्जा होती है। शिशु के मुख में जाने वाला पहला अन्न पूरी तरह शुद्ध, मंत्रपूत (मंत्रों द्वारा पवित्र किया गया) और दोषमुक्त होना चाहिए, ताकि बच्चे की बुद्धि और विचार सात्विक बनें। आयु, तेज और बल की वृद्धि: इस पूजा में अग्नि देव और अन्नपूर्णा माता से प्रार्थना की जाती है कि यह अन्न शिशु के शरीर में रक्त, मांस और मज्जा बनकर उसे अपार बल और तेज प्रदान करे। 🤝 'पूजा सारथी' ही क्यों? आपका भरोसा, हमारी जिम्मेदारी: सटीक शुभ मुहूर्त गणना: शास्त्रों के अनुसार लड़कों का अन्नप्राशन सम महीनों (६ठे, ८वें, १०वें महीने) में और लड़कियों का विषम महीनों (५वें, ७वें, ९वें महीने) में करना शुभ होता है। हमारे ज्योतिषाचार्य आपके बच्चे के लिए सबसे सटीक दिन और समय निकालकर देंगे। योग्य और सदाचारी पंडित जी: हमारे पंडित जी केवल पूजा नहीं कराते, बल्कि बच्चे के पहले भोजन से जुड़े शास्त्रों के नियमों और सावधानियों का पूरा मार्गदर्शन भी करते हैं। टेंशन-फ्री बुकिंग: पूजा की थाली से लेकर हवन की लकड़ी तक, सभी आवश्यक और शुद्ध सामग्रियों का प्रबंध आप हमारे जरिए आसानी से कर सकते हैं। ✨ आपके बच्चे का पहला निवाला, उसके जीवन में खुशियों और सेहत का मार्ग प्रशस्त करे। आज ही 'पूजा सारथी' ऐप पर अन्नप्राशन संस्कार पूजा बुक करें!
"Pandit ji performed the puja very peacefully and explained every ritual beautifully. Our entire family felt a divine presence and the atmosphere was very positive."
Ramesh Sharma
Verified Devotee
Usually 1hr – 3hr. Duration depends on the specific rituals flow.
You can choose the complete samagri kit during booking. Alternatively, you can arrange items from the "Self Arrange" list yourself.
Yes, we offer e-Puja via live video call with an experienced Vedic pandit.
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₹2,100
Continue to BookCall Now: +91 87509 29004Mon–Sun, 7 AM – 9 PM
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