
विवाह संस्कार का अत्यंत पावन और भावपूर्ण चरण— गौरी पूजन। सनातन परंपरा में विवाह बंधन में बंधने से पूर्व, कन्या द्वारा अखंड सौभाग्य, सुयोग्य जीवनसाथी और सुखद दांपत्य जीवन की कामना क...
Duration
1hr – 2hr
सनातन धर्म में विवाह को मात्र एक सामाजिक समझौता नहीं, बल्कि जन्म-जन्मांतर का पवित्र आत्मिक बंधन माना गया है। इस नए जीवन की शुरुआत से ठीक पहले, कन्या द्वारा किया जाने वाला गौरी पूजन (कई क्षेत्रों में इसे गौरी-हरहर, देवक या मंगला गौरी पूजन भी कहते हैं) सबसे महत्वपूर्ण और भावपूर्ण अनुष्ठान है। यह पूजा कन्या द्वारा अपने भावी दांपत्य जीवन की सुख-शांति, पति की दीर्घायु और दोनों परिवारों की समृद्धि के लिए माता पार्वती (गौरी जी) के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने और उनका आशीर्वाद लेने का माध्यम है। पूजन का धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व अखंड सौभाग्य की कामना: माता पार्वती ने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था। कन्याएं उन्हें अपना आदर्श मानकर सुयोग्य पति और अखंड सौभाग्य का वरदान मांगती हैं। विदाई की बेला और कृतज्ञता: यह अनुष्ठान कन्या के मायके में उसकी अंतिम मुख्य पूजाओं में से एक होता है, जहाँ वह अपने माता-पिता के घर की खुशहाली की प्रार्थना भी करती है। मानसिक सुदृढ़ता: नए घर और नए माहौल में प्रवेश करने से पहले, यह पूजा कन्या को आत्मिक बल, धैर्य और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। वेदी निर्माण व स्थापना: पूजा के स्थान को स्वच्छ करके गोबर या शुद्ध मिट्टी से लीपकर चौक पूरा जाता है। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता गौरी की प्रतिमा या मिट्टी से बनी गौरी जी की स्थापना की जाती है। संकल्प: कन्या हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर पंडित जी की उपस्थिति में सुखी दांपत्य जीवन के लिए व्रत/पूजा का संकल्प लेती है। शोडषोपचार पूजन: माता को पंचामृत से स्नान कराया जाता है। इसके बाद वस्त्र, मौली, चंदन, कुमकुम, सिंदूर, और अक्षत अर्पित किए जाते हैं। सुहाग सामग्री अर्पण: इस पूजा का सबसे मुख्य भाग है माता को सुहाग की पिटारी (मेहंदी, चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, काजल, कंघी आदि) चढ़ाना। कथा व आरती: गौरी पूजन की पौराणिक कथा सुनी जाती है और कपूर व घी के दीपक से माता की आरती उतारी जाती है। आशीर्वाद व विसर्जन: अंत में कन्या माता के चरण स्पर्श कर अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद लेती है।
"Pandit ji performed the puja very peacefully and explained every ritual beautifully. Our entire family felt a divine presence and the atmosphere was very positive."
Ramesh Sharma
Verified Devotee
Usually 1hr – 2hr. Duration depends on the specific rituals flow.
You can choose the complete samagri kit during booking. Alternatively, you can arrange items from the "Self Arrange" list yourself.
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