
यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार, जिसे उपनयन संस्कार भी कहते हैं, द्विजत्व (दूसरा जन्म) और ब्रह्मचर्य की शुरुआत का प्रतीक है। इसमें मुंडन, स्नान, गणेश पूजन, हवन, जनेऊ धारण (बाएं कंधे से दा...
Duration
1hr – 3hr
यज्ञोपवीत संस्कार की मुख्य विधि 1. पूर्व तैयारी और मुंडन: बालक का मुंडन किया जाता है और उसे स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाए जाते हैं। 2. गणेश पूजन व हवन: अग्नि स्थापना के बाद गणेश, वेदी और देवताओं का पूजन किया जाता है। 3. जनेऊ धारण: पवित्र यज्ञोपवीत को अभिमंत्रित कर बटुक (बालक) को धारण कराया जाता है। यह तीन धागों का होता है। 4. गायत्री मंत्र दीक्षा: गुरु या आचार्य बटुक के कान में गायत्री मंत्र का उपदेश देते हैं, जो बुद्धि को प्रखर करने के लिए होता है। 5. मेखला व दंड धारण: कमर में मूंज की मेखला (धागा) और पलाश का दंड धारण कराया जाता है, जो संयम और अनुशासन का प्रतीक है। 6. भिक्षाचरण: बटुक सबसे पहले माता और फिर अन्य जनों से भिक्षा मांगता है, जो अहंकार त्यागने की शिक्षा है। 7. संध्यावंदन का उपदेश: ब्रह्मचारी को नित्य गायत्री मंत्र के साथ संध्या वंदन करने की दीक्षा दी जाती है। महत्वपूर्ण नियम: • जनेऊ को सदैव बाएं कंधे के ऊपर और दाहिने हाथ के नीचे पहना जाता है। • मल-मूत्र त्यागते समय जनेऊ को कान के ऊपर लपेटना अनिवार्य है, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभदायक है।
"Pandit ji performed the puja very peacefully and explained every ritual beautifully. Our entire family felt a divine presence and the atmosphere was very positive."
Ramesh Sharma
Verified Devotee
Usually 1hr – 3hr. Duration depends on the specific rituals flow.
You can choose the complete samagri kit during booking. Alternatively, you can arrange items from the "Self Arrange" list yourself.
Yes, we offer e-Puja via live video call with an experienced Vedic pandit.
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