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Pujas

Traditional worship ceremonies for various occasions and deities. Book experienced pandits for authentic Vedic rituals.

37 Pujas Available

37 Results found

Satyanarayan Katha (श्री सत्यनारायण पूजा) view 1Satyanarayan Katha (श्री सत्यनारायण पूजा) view 2
puja
भगवान सत्यनारायण (विष्णु)

Satyanarayan Katha (श्री सत्यनारायण पूजा)

भगवान सत्यनारायण की पूजा अत्यंत शुभ और फलदायी है। यह पूजा परिवार में सुख, समृद्धि और शांति लाती है। किसी भी मांगलिक कार्य या मनोकामना पूर्ति के लिए यह पूजा की जाती है।

1hr – 3hr
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Grah Pravesh (गृह प्रवेश पूजा) view 1Grah Pravesh (गृह प्रवेश पूजा) view 2
puja
भगवान गणेश और माँ लक्ष्मी वास्तुपुरुष

Grah Pravesh (गृह प्रवेश पूजा)

नए घर में प्रवेश से पहले की जाने वाली यह पूजा अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और वास्तु दोष दूर होते हैं। गणेश और लक्ष्मी की पूजा से घर में सुख-समृद्धि आती है।

2hr – 3hr
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Ganpati Sthapna (गणपति स्थापना पूजा) view 1Ganpati Sthapna (गणपति स्थापना पूजा) view 2
puja
भगवान गणेश

Ganpati Sthapna (गणपति स्थापना पूजा)

भगवान गणेश विघ्नहर्ता और सिद्धिदाता हैं। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में गणेश पूजा अवश्य की जाती है। यह पूजा सभी बाधाओं को दूर कर सफलता प्रदान करती है।

1hr – 3hr
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भूमि (पृथ्वी)पूजा view 1भूमि (पृथ्वी)पूजा view 2
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भूमि देवी

भूमि (पृथ्वी)पूजा

निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भूमि देवी की पूजा की जाती है। यह पूजा भूमि को शुद्ध करती है और निर्माण में सफलता प्रदान करती है।

0hr 30min – 1hr 30min
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माँ गौरी पूजा view 1माँ गौरी पूजा view 2
puja
माँ गौरी

माँ गौरी पूजा

माँ गौरी पार्वती का ही रूप हैं। यह पूजा विवाहित महिलाओं के लिए विशेष फलदायी है और सुहाग की रक्षा करती है।

1hr – 2hr
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शिव रुद्राभिषेक पूजा view 1शिव रुद्राभिषेक पूजा view 2
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भगवान शिव

शिव रुद्राभिषेक पूजा

भगवान शिव का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है। यह पूजा अत्यंत फलदायी है।

2hr – 4hr
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धनतेरस धनवंतरी पूजा view 1धनतेरस धनवंतरी पूजा view 2
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माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि एवं कुबेर जी

धनतेरस धनवंतरी पूजा

धनतेरस पर माँ लक्ष्मी और धन्वंतरि की पूजा की जाती है। इस दिन नए बर्तन या आभूषण खरीदना शुभ माना जाता है।

1hr – 2hr
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महालक्ष्मी विशेष पूजा view 1महालक्ष्मी विशेष पूजा view 2
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माँ लक्ष्मी

महालक्ष्मी विशेष पूजा

माँ लक्ष्मी धन और समृद्धि की देवी हैं। शुक्रवार एवं दीपावली पर लक्ष्मी जी की पूजा विशेष फलदायी होती है। जोकि कारोबार वृद्धि ऑफिस या घर में उन्नति करती है

1hr – 3hr
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कालसर्प दोष निवारण पूजा view 1कालसर्प दोष निवारण पूजा view 2
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भगवान शिव और नाग देवता

कालसर्प दोष निवारण पूजा

काल सर्प दोष निवारण के लिए यह पूजा अत्यंत फलदायी है। भगवान शिव और नाग देवता की पूजा की जाती है।

2hr – 3hr
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नवरात्रि कलश स्थापन पूजा view 1नवरात्रि कलश स्थापन पूजा view 2
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माँ दुर्गा (नवदुर्गा)

नवरात्रि कलश स्थापन पूजा

नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। यह अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली पर्व है।

1hr – 2hr
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श्री दुर्गा सप्तशती पाठ view 1श्री दुर्गा सप्तशती पाठ view 2
puja
माँ नवदुर्गा

श्री दुर्गा सप्तशती पाठ

माँ दुर्गा शक्ति की देवी हैं। यह पूजा सभी बुराईयों का नाश करती है और सुरक्षा प्रदान करती है।

2hr – 4hr
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सोमवार या प्रदोष व्रत उद्यापन शिव पूजा view 1सोमवार या प्रदोष व्रत उद्यापन शिव पूजा view 2
puja
भगवान शिव

सोमवार या प्रदोष व्रत उद्यापन शिव पूजा

भगवान शिव आदिदेव हैं। शिव पूजा से आध्यात्मिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

1hr – 2hr
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श्री लड्डू गोपाल जी का गोपाल सहस्त्रनाम द्वारा दिव्य अभिषेक  view 1श्री लड्डू गोपाल जी का गोपाल सहस्त्रनाम द्वारा दिव्य अभिषेक  view 2
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भगवान बालकृष्ण

श्री लड्डू गोपाल जी का गोपाल सहस्त्रनाम द्वारा दिव्य अभिषेक

भगवान कृष्ण प्रेम और आनंद के देवता हैं। कृष्ण पूजा से जीवन में प्रेम, आनंद और समृद्धि आती है।

1hr – 3hr
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महाशिवरात्रि नमक चमक रूद्राभिषेक पूजा view 1महाशिवरात्रि नमक चमक रूद्राभिषेक पूजा view 2
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भगवान शिव

महाशिवरात्रि नमक चमक रूद्राभिषेक पूजा

महाशिवरात्रि की रात्रि भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। यह अत्यंत पवित्र और मोक्षदायी पर्व है।

2hr – 4hr
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नए व्यापार का पूजन view 1नए व्यापार का पूजन view 2
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भगवान गणेश और माँ लक्ष्मी

नए व्यापार का पूजन

नए व्यापार या कार्यालय के उद्घाटन पर यह पूजा की जाती है। गणेश और लक्ष्मी की कृपा से व्यापार में वृद्धि होती है।

1hr – 3hr
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नामकरण संस्कार view 1नामकरण संस्कार view 2
puja
भगवान गणेश

नामकरण संस्कार

शिशु का नामकरण सोलह संस्कारों में से एक है। जन्म के 11वें या 21वें दिन यह संस्कार किया जाता है।

1hr – 3hr
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अन्नप्राशन संस्कार view 1अन्नप्राशन संस्कार view 2
puja
भगवान गणेश

अन्नप्राशन संस्कार

शिशु को पहली बार अन्न (भोजन) खिलाने का संस्कार। यह 6वें या 8वें माह में किया जाता है।

1hr – 2hr
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जन्मदिन (Happy Birthday)पूजा view 1जन्मदिन (Happy Birthday)पूजा view 2
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इष्ट देव

जन्मदिन (Happy Birthday)पूजा

जन्मदिन पर इष्ट देव की पूजा करने से दीर्घायु और स्वास्थ्य प्राप्त होता है।

1hr – 3hr
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शिशु मुण्डन संस्कार पूजा view 1शिशु मुण्डन संस्कार पूजा view 2
puja
भगवान गणेश

शिशु मुण्डन संस्कार पूजा

*चूड़ाकर्म संस्कार (या मुंडन संस्कार)* सनातन हिंदू धर्म के सोलह संस्कारों में से आठवां है, जिसमें शिशु के जन्म के बाद पहली बार सिर के बाल उतारे जाते हैं, जो स्वास्थ्य, शुद्धिकरण, बुद्धि वृद्धि, दीर्घायु और पिछले जन्म के अवांछित संस्कारों से मुक्ति का प्रतीक है, ताकि शिशु को निरोगी, तेजस्वी और यशस्वी बनाया जा सके, जिसमें अक्सर शिखा (छोटी चोटी) छोड़ी जाती है और वैदिक मंत्रों का जाप किया जाता है। *महत्व और उद्देश्य:* स्वास्थ्य: गर्भ के बालों को अशुद्ध माना जाता है; उन्हें हटाने से सिर की खुजली, फोड़े और जूँ जैसी समस्याओं से बचाव होता है और सिर हल्का व ठंडा रहता है। शुद्धि और नवीनीकरण: यह शिशु को शारीरिक और मानसिक शुद्धता प्रदान करता है, जिससे वह नई ऊर्जा के साथ जीवन की शुरुआत करता है। *बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास* : यह मस्तिष्क को पुष्ट करता है, बुद्धि, बल और तेज की वृद्धि करता है, और बच्चे को अच्छे संस्कारों की ओर प्रेरित करता है। दीर्घायु और समृद्धि: वेदों के अनुसार, यह संस्कार बालक की लंबी आयु, ऐश्वर्य और उत्तम संतान प्राप्ति के लिए किया जाता है। *प्रक्रिया और परंपरा:* समय: यह संस्कार शिशु के पहले, तीसरे, पांचवें या सातवें वर्ष में, किसी शुभ मुहूर्त में किया जाता है, अक्सर अन्नप्राशन संस्कार के बाद। *मुंडन:* शिशु के सिर के बाल पहली बार उस्तरे (क्षुर) से उतारे जाते हैं, जिससे गर्भजन्य अशुद्ध बाल हट जाते हैं। *शिखा:* सिर के बीच में थोड़े बाल छोड़े जाते हैं (शिखा), जिससे कॉस्मिक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और यह हिंदुत्व की पहचान भी है। *मंत्रोच्चार:* नाई द्वारा बाल उतारते समय वैदिक मंत्रों का जाप किया जाता है, और माता मन ही मन गायत्री मंत्र का जप करती है। *लेपन*: बाल उतारने के बाद सिर पर दूध, दही, घी और जल मिलाकर लेप लगाया जाता है, और चंदन या रोली से 'ॐ' या स्वस्तिक बनाया जाता है। *विसर्जन:* उतारे गए बालों को गोबर में लपेटकर या आटे के गोले में रखकर भूमि में गाड़ दिया जाता है या नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है, ताकि वे खाद बनकर धरती को उपजाऊ बनाएं। संक्षेप में, चूड़ाकर्म संस्कार शिशु के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है जो उसके शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए किया जाने वाला एक पवित्र अनुष्ठान है। यह संस्कार आप हमारे वैदिक विद्वानों के द्वारा करा सकते हैं

0hr 30min – 1hr
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मंगल ग्रह

मंगलीक दोष निवारण पूजा

मंगल दोष के कारण विवाह में बाधा आती है। मंगल देव जी की पूजा से यह दोष दूर होता है।

2hr – 4hr
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पितृ दोष निवारण view 1पितृ दोष निवारण view 2
puja
पितृ देवता

पितृ दोष निवारण

पितृों की अशांति से जीवन में बाधाएं आती हैं। पितृ दोष शांति पूजा से पूर्वजों को शांति मिलती है।

3hr – 4hr
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शनि ग्रह पीड़ा दोष निवारण view 1शनि ग्रह पीड़ा दोष निवारण view 2
puja
शनिदेव

शनि ग्रह पीड़ा दोष निवारण

शनि देव की कृपा से शनि दोष दूर होता है। शनिवार को यह पूजा विशेष फलदायी है।

3hr – 4hr
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गंडमूल शांति पूजा view 1गंडमूल शांति पूजा view 2
puja
भगवान गणेश

गंडमूल शांति पूजा

मूल नक्षत्र में जन्मे जातकों के लिए यह पूजा अत्यंत आवश्यक है। यह दोष निवारण करती है। अब जीवन में उज्जवलता लाती है

2hr – 4hr
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माता की चौकी view 1माता की चौकी view 2
puja
माँ दुर्गा

माता की चौकी

माता की चौकी में माँ दुर्गा के भजन और आरती की जाती है। यह अत्यंत प्रसिद्ध भक्ति परंपरा है।

3hr – 4hr
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मां सरस्वती पूजा view 1मां सरस्वती पूजा view 2
puja
माँ सरस्वती

मां सरस्वती पूजा

माँ सरस्वती विद्या और संगीत की देवी हैं। बसंत पंचमी पर यह पूजा विशेष फलदायी है।

1hr – 3hr
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लघु रुद्र पूजा view 1लघु रुद्र पूजा view 2
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भगवान शिव

लघु रुद्र पूजा

लघु रुद्र पूजा में रुद्र पाठ के साथ विस्तृत शिव पूजा की जाती है। यह अत्यंत शक्तिशाली पूजा है।

1hr – 4hr
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हनुमान चालीसा पाठ view 1हनुमान चालीसा पाठ view 2
puja
भगवान हनुमान

हनुमान चालीसा पाठ

हनुमान चालीसा का पाठ अत्यंत शक्तिशाली है। मंगलवार और शनिवार को यह विशेष फलदायी है।

3hr – 5hr
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अखंड रामायण पाठ view 1अखंड रामायण पाठ view 2
puja
भगवान राम

अखंड रामायण पाठ

अखंड रामायण पाठ 24 घंटे निरंतर चलता है। यह अत्यंत पवित्र और फलदायी पाठ है।

22hr – 24hr
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Sunderkand Path संगीतमय सुंदरकांड पाठ view 1Sunderkand Path संगीतमय सुंदरकांड पाठ view 2
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भगवान हनुमान

Sunderkand Path संगीतमय सुंदरकांड पाठ

सुंदरकांड रामायण का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह पाठ शक्ति और सफलता प्रदान करता है।

2hr – 4hr
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श्री विष्णु सहस्रनाम पाठ  view 1श्री विष्णु सहस्रनाम पाठ  view 2
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भगवान विष्णु

श्री विष्णु सहस्रनाम पाठ

भगवान विष्णु के 1000 नामों का पाठ। यह अत्यंत पवित्र और शांतिदायक पाठ है।

0hr 30min – 0hr 30min
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पितृ तर्पण श्राद्ध पूजा view 1पितृ तर्पण श्राद्ध पूजा view 2
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पितृ देवता

पितृ तर्पण श्राद्ध पूजा

पितृ पक्ष में पूर्वजों की याद में श्राद्ध किया जाता है। यह पूर्वजों को शांति प्रदान करता है।

0hr 30min – 1hr
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अंतिम संस्कार view 1अंतिम संस्कार view 2
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अग्नि देव

अंतिम संस्कार

अंतिम संस्कार सोलह संस्कारों में अंतिम है। यह आत्मा को शांति और मोक्ष प्रदान करता है।

4-6 घंटे
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विवाह (पाणिग्रहण) संस्कार  view 1विवाह (पाणिग्रहण) संस्कार  view 2
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अग्नि देव एवं प्रकृति के सभी देवगणों की पूजा

विवाह (पाणिग्रहण) संस्कार

विवाह संस्कार क्या है ...विवाह संस्कार सनातन हिन्दू धर्म में एक पवित्र और महत्वपूर्ण संस्कार है, जो दो व्यक्तियों (वर और वधू) को जीवन भर के लिए पति-पत्नी के रूप में जोड़ता है उन्हें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष (चार पुरुषार्थों) की प्राप्ति के लिए एक साथ बांधता है, और उन्हें निष्ठावान गृहस्थ जीवन जीने की प्रेरणा देता है, जिसमें वे एक-दूसरे के प्रति समर्पण और सहयोग का भाव रखते हैं। यह सोलह संस्कारों में से एक है और जीवन के उत्तरार्ध (विद्याध्ययन के बाद) में गृहस्थ आश्रम में प्रवेश का द्वार खोलता है, जिससे पितृ ऋण से उऋण होने में मदद मिलती है। । *मुख्य उद्देश्य और महत्व:* आत्माओं का मिलन: यह दो आत्माओं को एक साथ लाता है, जिससे वे एक संयुक्त इकाई के रूप में जीवन बिता सकें। गृहस्थ जीवन की शुरुआत: यह विद्याध्ययन के बाद गृहस्थ आश्रम में प्रवेश का माध्यम है, जो समाज और परिवार के लिए आवश्यक है। *ऋण मुक्ति:* यह पितृ ऋण (संतानोत्पत्ति द्वारा) और अन्य ऋणों से मुक्ति पाने का एक तरीका है। *समर्पण और सेवा:* यह पति-पत्नी के बीच समर्पण, सेवा और सहयोग के भाव को मजबूत करता है, जहाँ वे एक-दूसरे की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देते हैं। आदर्श जीवन: यह राम-सीता जैसे आदर्श दंपतियों की तरह निष्ठावान और प्रेमपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देता है। *प्रमुख रस्में (संक्षिप्त):* द्वाराचार (Dwarachar): दूल्हे का स्वागत और पूजन। वागदान (Vagdan): वचनबद्धता। हस्तबंद/कन्यादान (Hastbandh/Kanyadaan): कन्या का दान। पाणिग्रहण (Panigrahan): वर-वधू का हाथ पकड़ना और पत्नी के रूप में स्वीकार करना। सप्तपदी/फेरे (Saptapadi/Fere): अग्नि के चारों ओर सात फेरे लेना, जिसमें सात वचन लिए जाते हैं। ग्रन्थिबन्धन (Granthibandhan): गांठ बांधना, जिसमें गांठ में दूर्वा, पुष्प, हल्दी आदि रखकर आजीवन साथ रहने का संकल्प लिया जाता है। संक्षेप में, विवाह संस्कार केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक, सामाजिक और नैतिक बंधन है जो जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होता है।

1hr – 3hr
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भगवान विश्वकर्मा पूजा  view 1भगवान विश्वकर्मा पूजा  view 2
puja
भगवान विश्वकर्मा

भगवान विश्वकर्मा पूजा

भगवान विश्वकर्मा को हिंदू धर्म में सृष्टि का शिल्पकार, पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है। उन्हें मशीनों, औजारों और निर्माण का देवता कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, उन्होंने सोने की लंका, द्वारका, इंद्रपुरी और हस्तिनापुर जैसे दिव्य नगरों का निर्माण किया था। निर्माण के देवता: उन्हें यंत्रों और शिल्प का अधिष्ठाता माना जाता है। पौराणिक निर्माण: उन्होंने स्वर्गलोक, सोने की लंका (रावण की), द्वारका (श्रीकृष्ण की) और पांडवों की इंद्रप्रस्थ नगरी का निर्माण किया था। अस्त्र-शस्त्र: विश्वकर्मा जी ने देवताओं के लिए वज्र और कई अन्य दिव्य अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया। पूजा का महत्व: विश्वकर्मा पूजा के दिन फैक्ट्रियों, कारखानों और कार्यशालाओं में मशीनरी और औजारों की पूजा की जाती है ताकि वे सुचारू रूप से चलें।

2hr – 3hr
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Engagement Puja view 1Engagement Puja view 2
puja
Shiv parwati

Engagement Puja

विवाह से पूर्व रिश्ते को मजबूती प्रदान करने हेतु विघ्न विनाशक भगवान गणेश गौरी ,नवग्रह एवं अन्य देवताओं से प्रार्थना

0hr 30min – 1hr
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Roka (Tilak ceremony) view 1Roka (Tilak ceremony) view 2
puja
Ganesh lakshmi

Roka (Tilak ceremony)

इस पूजा में पंचदेव पूजन जैसे गणेश गौरी, नवग्रह पूजन एवं अन्य मंगल वेद ध्वनि द्वारा वर को (टीका) ,माला, वस्त्र,मिष्ठान , नारियल, आभूषण आदि प्रदान किया जाता है

0hr 30min – 1hr
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Yagyopavit Sanskar यज्ञोपवीत संस्कार (बाल्यावस्था) view 1Yagyopavit Sanskar यज्ञोपवीत संस्कार (बाल्यावस्था) view 2
puja
Satguru

Yagyopavit Sanskar यज्ञोपवीत संस्कार (बाल्यावस्था)

यज्ञोपवीत संस्कार की मुख्य विधि 1. पूर्व तैयारी और मुंडन: बालक का मुंडन किया जाता है और उसे स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाए जाते हैं। 2. गणेश पूजन व हवन: अग्नि स्थापना के बाद गणेश, वेदी और देवताओं का पूजन किया जाता है। 3. जनेऊ धारण: पवित्र यज्ञोपवीत को अभिमंत्रित कर बटुक (बालक) को धारण कराया जाता है। यह तीन धागों का होता है। 4. गायत्री मंत्र दीक्षा: गुरु या आचार्य बटुक के कान में गायत्री मंत्र का उपदेश देते हैं, जो बुद्धि को प्रखर करने के लिए होता है। 5. मेखला व दंड धारण: कमर में मूंज की मेखला (धागा) और पलाश का दंड धारण कराया जाता है, जो संयम और अनुशासन का प्रतीक है। 6. भिक्षाचरण: बटुक सबसे पहले माता और फिर अन्य जनों से भिक्षा मांगता है, जो अहंकार त्यागने की शिक्षा है। 7. संध्यावंदन का उपदेश: ब्रह्मचारी को नित्य गायत्री मंत्र के साथ संध्या वंदन करने की दीक्षा दी जाती है। महत्वपूर्ण नियम: • जनेऊ को सदैव बाएं कंधे के ऊपर और दाहिने हाथ के नीचे पहना जाता है। • मल-मूत्र त्यागते समय जनेऊ को कान के ऊपर लपेटना अनिवार्य है, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभदायक है।

1hr – 3hr
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